विचारों में रखते थे आजादी की आंधी, महान संत थे महात्मा गांधी।

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लेखिका/कवयित्री

सुश्री सरोज कंसारी

नवापारा राजिम, छत्तीसगढ़

 

           (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

                      आलेख

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                 गाँधी जयंती विशेष

               ————————–

      विचारों में रखतें थे आजादी की आंधी,

             महान संत थे महात्मा गांधी।

 

    विचारों में रखें आजादी की आँधी

    महान संत पुरुष थे महात्मा गांधी।

    सत्य- अहिंसा के कहलाते पुजारी

   माता-पिता के थे पुत्र आज्ञाकारी।।

 

           इस धरा पर अनेक महापुरुष अवतरित हुए, जिन्होंने अपने विचारों से असंभव की सीमा को पार कर महान कार्य किए। कोई भी सार्थक विचार धारा, जिंदगी को सुखद सुंदर और व्यवस्थित बनाने में सहयोग प्रदान करते हैं। साधु-संतों की महिमा-मंडित इस पावन माटी की सौंधी महक चारो दिशा में फैली हुई हैं।हमारी सभ्यता और संस्कृति हर किसी के लिए अनुकरणीय हैं। राम-कृष्ण, गौतम-नानक, सुभाष, भगत सिंह आदि ने देशहित में अपना सर्वस्व बलिदान कर अमर हों गए, और इतिहास के पन्नो पर एक स्वर्णिम युग का निर्माण किए।

       स्व से ऊपर उठ समाज राष्ट्र के विकास के लिए जो बातें हृदय से निकलती हैं, वही विचारधारा बनती हैं। वैसे तो अपनी जिंदगी सभी जी लेते हैं, सुबह के बाद रात होती हैं। लेकिन जों औरों की भलाई के लिए जो अपना अमूल्य समय खर्च करते हैं, दुनिया की भीड़ में वही अलग दिखते हैं और महान होते हैं।

      एक ऐसे महापुरुष जो दिखने में बिल्कुल साधारण दुबले-पतले, लाठी पकड़े, लंगोटी पहने, जिन्होंने अपने इस सादगी से ही स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम भूमिका निभाई। बड़े बड़े आंदोलन को बिनाअस्त्र-शस्त्र के सफल बनाया। अंग्रेजों की सत्ता हिला दी। जो सिर्फ महान ही नही संत भी थे, महानायक थे, सफल नेतृत्वकर्ता थे। उनके पास बम-बारूद, तोप नहीं थे, जब देश गुलाम था सभी व्याकुल थे, आजादी के लिए कई उपाएं किए। हर वर्ग के लोग एकजुट होकर स्वतंत्रता के अग्निकुंड में अपने कर्मो की आहूति देकर, भारत माता को आजादी दिलाने का यत्न कर रहें थे। उस वक्त साबरमती के संत ने किया कमाल, बचपन से ही माता कस्तूरबा गाँधी के धार्मिक स्वभाव, सत्संग और सद्व्यवहार के कारण वे मातृ-पितृ भक्त तो थे ही, जब विलायत पढ़ाई करने जा रहें थे तब माँ ने वचन लिए- भारतीय संस्कृति का सदैव पालन करना, मांस- मदिरा का सेवन नही करना, सत्य के मार्ग पर चलना। उन्होंने उसका सदैव पालन किया और असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक कानून तोड़ा। सिर्फ अपने आदर्शों पर चलकर ही देशभक्ति का जज्बा जगाया।

    विदेशी वस्तुओं की जला दी होली

    पैदल यात्रा कर नमक कानून तोड़ी।

    स्वच्छ्ता की चहुँ ओर दीप जला दी

    रामराज्य की कल्पना जेहन में थी।।

                 महात्मा गाँधी वो लौ हैं जिन्होंने अपने आदर्शों से एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए। उनके पास एक दिव्य और चमत्कारी हथियार था। जो आज भी मजबूत हैं-सत्य और अहिँसा, उनके लिए धर्म था।गांधी जी का मानना था कि- सत्य की राह पर चलकर की महान कार्य किए जा सकते हैं। हम जो करते हैं उनके गवाह साक्षात ईश्वर होते हैं, इसलिए झूठ का सहारा तनिक देर का होता हैं और सत्य की उम्र लंबी होती हैं। वे जानते थे आजादी की लड़ाई भी सत्य का दामन थामकर ही जीत सकते हैं। सत्य जिसमे छल-प्रपंच, कपट और बैर नही होता, इसलिए सत्य का साथ छोड़ना उचित नहीं। आजीवन वे सत्य के पुजारी रहें।

             गांधी जी अहिँसा को अपनाकर सारे विश्व में शांति व्यवस्था स्थापित करना चाहते थे। अहिंसा अर्थात मन, वचन और कर्म से भी किसी का बुरा नही नहीं करना। अहिंसा वह हथियार हैं जिसकी बदौलत हम हर अत्याचार को मिटा सकते है। अहिंसा से आत्मबल बढ़ता हैं, भय समाप्त होता हैं। किसी को नुकसान न पहुँचना अर्थात किसी को अपना शत्रु नहीं मानना। अगर कोई गलत करता हैं, तो उसका सामना क्रोधित होकर नहीं शांत मन से करना अर्थात क्षमा का भाव रखना। प्रेम पूर्वक समस्या को सुलझाने का अंत तक प्रयास करना। गांधी जी का मानना था अहिँसा का पालन समस्त मानव समाज के कल्याण की दिशा में एक बढ़िया स्रोत हैं। जिससे हम समाज की समस्त बुराइयों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने हर कठिन परिस्थिति अहिँसा का प्रयोग किया। अंगेजों के अत्यचार के खिलाफ उनका सबसे कारगर साधन बना।

   शुद्ध- सात्विक रहें सदा शाकाहारी

   अंग्रेजो को उनकी औकात दिखाई। 

   आँख में चश्मा और बांधे लंगोटी

    देशभक्ति की कभी राह न छोड़ी।।

            गाँधी जी सत्य की शक्ति को पहचानकर आगे बढ़े कभी रुके नहीं, कभी झुके नहीं। अकेले निकल पड़े देशहित कार्य करने और कारवां बनता गया। सत्य के मार्ग पर अनवरत जो चलते हैं वो कभी पराजित नहीं होते, क्योकि आतंक- अत्याचार, दुर्व्यवहार कभी न कभी परास्त होता ही हैं। लेकिन सत्य के साथी ईश्वर हैं गांधी जी ने सिद्ध किया कोई भी महान कार्य बिना सत्य के अनुकरण के सफल हो ही नही सकता।

         आज वर्तमान परिवेश में गाँधी जी के सत्य और अहिँसा सबसे मजबूत साधन हैं मानसिक शांति प्राप्त करने का जरूरत हैं ।सिर्फ बातों में ही नहीं हकीकत में इसे अपनाएं और आज की युवापीढ़ी को सत्य अहिँसा की शक्ति को बताएं अनुकरण करें।

     सर्वधर्म सद्भाव की रीत चलायी

     ऊंच-नीच की सारी दीवारें गिरा दी।

     नेतृत्व क्षमता में रहे ही सदा अग्रणी

     चरखा चला आत्मनिर्भरता सिखायी।।

                 “”””””””””””””””””””””

                             

                      

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