संवाददाता आगर मालवा : गोवर्धन कुम्भकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
मंडी के अभाव में किसानों को मिल रहे कम दाम, केवल लहसुन-प्याज और संतरे के सीजन में होता है मंडी का उपयोग।
लाखों रुपए से बनी कानड़ कृषि मंडी में नहीं हो रही खरीदी, किसान खुले बाजार में उपज बेचने को मजबूर।
कानड़: नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनो सोयाबीन की कटाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस बार सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद क्षेत्र में सोयाबीन की फसल अच्छी हुई है। खेतों में कहीं कटाई का कार्य जारी है, तो कहीं थ्रेसर मशीन से फसल निकालकर किसान अपने घरों पर उपज जमा कर रहे हैं। वहीं, जरूरतमंद किसान आर्थिक आवश्यकताओं के चलते अपनी उपज खुले बाजार में व्यापारियों के यहां बेचने को मजबूर हैं।
विडंबना यह है कि नगर में लाखों रुपये की लागत से बनी कृषि उपज मंडी होने के बावजूद यहां नियमित रूप से खरीदी नहीं हो रही है। ऐसे में किसानो को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने में परेशानी हो रही है। कृषि उपज मंडी का निर्माण किसानों को उनकी उपज के उचित दाम दिलाने और खरीदी-बिक्री की व्यवस्थित सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। वर्षों बाद भी मंडी का नियमित संचालन शुरू नहीं हो पाया।
लाखों रुपए से बनी कृषि उपज उप मंडी ऐसे वीरान पड़ी है।
इसके चलते किसान अपनी उपज व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर खुले बाजार में बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि मंडी में उपज बेचने पर भाव और भुगतान की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी रहती है। वहीं, खुले बाजार में व्यापारियों के यहां उपज बेचने पर भाव में अंतर देखने को मिलता है।
किसान योगेश शर्मा, सिद्धनाथ सिंह, पवन धन सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि मंडी चालू नहीं होने के कारण उनके पास खुले बाजार में उपज बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आर्थिक जरूरतों के चलते उन्हें
मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर बेचनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि जब शासन ने लाखों रुपये खर्च कर मंडी का निर्माण करवाया है, तो इसका नियमित संचालन करने में आखिर क्या परेशानी है।
खुले बाजार में खरीदी के दौरान व्यापारियों के प्रतिष्ठानों के बाहर किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहन खड़े रहते हैं। इससे मार्ग पर आवागमन प्रभावित होता है। कई बार यातायात व्यवस्था भी बाधित होती है। यदि कृषि उपज मंडी में नियमित खरीदी शुरू हो जाए, तो किसानों को व्यवस्थित स्थान
व्यापारियों के प्रतिष्ठानों के सामने इस तरह खड़े रहते हैं वाहन।
मिलेगा। सड़क पर वाहनो की भीड़ से भी राहत मिल सकेगी।
सीजन के अनुसार उपयोग नियमित खरीदी पर सवाल
कृषि उपज मंडी की एक और विडंबना यह है कि यहां नियमित रूप से सोयाबीन सहित अन्य फसलों की खरीदी नहीं होती। संतरे के सीजन में संतरा व्यापारी मंडी परिसर का उपयोग करते हैं। लहसुन-प्याज के सीजन में संबंधित व्यापारी भी मंडी परिसर का उपयोग करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि किसानों की मुख्य उपज की खरीदी के समय मंडी का नियमित
संचालन क्यों नहीं होता। किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि किसानों के हितों को स ध्यान में रखते हुए कृषि उपज मंडीत का शीघ्र नियमित संचालन शुरू कि किया जाए। इससे किसानों को क अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा। खुले बाजार में कम दामों नि पर फसल बेचने की मजबूरी से भी नि राहत मिलेगी।
किया। इस संबंध में मंडी सचिव अश्विन सिन्हा आगर से चर्चा करने के लिए फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं






