राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
घटनाएं क्यों घटती हैं!
(समालोचना)
बिना कारण कोई घटना नहीं होती यह कहावत सदियों से दर्शन, विज्ञान और रोज़मर्रा की सोच में गहरी जड़ें जमाए हुए है। लेकिन क्वांटम सिद्धांत हमें बताता है कि प्रकृति के कुछ सूक्ष्म स्तर पर घटनाएँ बिलकुल अनिश्चित और संभाव्य (probabilistic) तरीके से घटती हैं, जहाँ शास्त्रीय अर्थ में कोई निश्चित “कारण” नहीं दिखता। दोनों बातें एक साथ सही कैसे हो सकती हैं? आइए इस मुद्दे को विस्तार से समझें।
शास्त्रीय कारण-कार्य सिद्धांत
शास्त्रीय भौतिकी (न्यूटनियन यांत्रिक, विद्युत चुंबकत्व आदि) और अधिकतर दर्शन में यह माना जाता है कि हर घटना का कोई पूर्ववर्ती कारण होता है। यदि किसी तंत्र की वर्तमान स्थिति पूरी तरह ज्ञात हो, तो भविष्य पूरी तरह निर्धारित होता जा सकता है (लाप्लास का दैत्य वाला विचार)। रेडियोधर्मी क्षय, परमाणु टक्कर या किसी कण का पथ सब कुछ कारणों की श्रृंखला से बंधा हुआ लगता है। इस दृष्टि से “बिना कारण घटना” असंभव है।
क्वांटम सिद्धांत क्या कहता है?
क्वांटम यांत्रिकी में स्थिति अलग है। यहाँ घटनाएँ संभाव्यता के नियमों से संचालित होती हैं, न कि निश्चित निर्धारण से, इसके लिए अनिश्चितता सिद्धांत (हेइजेनबर्ग) किसी कण की स्थिति और संवेग को एक साथ पूर्ण सटीकता से नहीं जाना जा सकता। यह मात्र माप की सीमा नहीं, बल्कि प्रकृति का मूल गुण है। दूसरा कारण रेडियोधर्मी क्षय, किसी अस्थिर परमाणु का क्षय कब होगा, इसका सटीक समय पहले से नहीं बताया जा सकता। केवल इतना कहा जा सकता है कि किसी निश्चित समय में क्षय की संभावना कितनी प्रतिशत है। एक अकेला परमाणु बिना किसी बाहरी “ट्रिगर” के अचानक क्षय हो सकता है।
तरंग-फलन का पतन (wave function collapse): माप करने पर क्वांटम तंत्र कई संभावित अवस्थाओं में से एक में “गिर” जाता है। किस अवस्था में गिरेगा, यह संभाव्य है। कोपेनहेगन व्याख्या में यह प्रक्रिया मूलतः अनिश्चित मानी जाती है। क्वांटम सुरंगन (tunneling) कण बाधा पार कर सकता है, भले ही उसके पास पर्याप्त ऊर्जा न हो। यह प्रक्रिया भी संभाव्य है।
इन घटनाओं में शास्त्रीय अर्थ का “कारण” नहीं दिखता, कोई बाहरी बल या पूर्ववर्ती घटना नहीं होती जो निश्चित रूप से परिणाम तय करे। केवल संभाव्यता का नियम काम करता है।
क्या वाकई “बिना कारण” है?
उल्लेखनीय है कि यहाँ बात थोड़ी सूक्ष्म हो जाती है। क्वांटम घटनाएँ “बिना किसी नियम के” नहीं घटतीं। वे क्वांटम यांत्रिकी के गणितीय नियमों (श्रोडिंगर समीकरण, संभाव्यता वितरण) का पालन करती हैं। इसलिए पूर्ण यादृच्छिकता नहीं , घटनाएँ कानूनहीन नहीं हैं, वे संभाव्य नियमों से बंधी हैं।
निर्धारित कारण नहीं, शास्त्रीय निर्धारणवाद (determinism) यहाँ टूट जाता है। भविष्य की घटना को वर्तमान अवस्था से 100% निश्चितता के साथ नहीं बताया जा सकता।
व्याख्याओं का मूल अंतर यह कि कोपेनहेगन व्याख्या में अनिश्चितता मूलभूत है। बोहमियन यांत्रिकी (छिपी चर वाली व्याख्या) में निर्धारणवाद बचा रहता है, लेकिन छिपे चर प्रयोगों में नहीं दिखते हैं। अनेक-विश्व व्याख्या में सभी संभावनाएँ अलग-अलग ब्रह्मांडों में साकार होती हैं।हमारी दृष्टि से अनिश्चितता प्रतीत होती है।
अधिकांश भौतिक विज्ञानी मानते हैं कि क्वांटम स्तर पर प्रकृति में एक प्रकार की मूलभूत अनिश्चितता है। यह अनिश्चितता “कारण की अनुपस्थिति” नहीं, बल्कि “निर्धारित कारण की अनुपस्थिति” है।
दर्शन और रोज़मर्रा की दुनिया पर असर
रोजमर्रा की दुनिया में शास्त्रीय कारण-कार्य सिद्धांत लगभग पूरी तरह काम करता है, क्योंकि क्वांटम अनिश्चितताएँ औसत होकर गायब हो जाती हैं -डीकोहेरेंस,,बड़े पैमाने पर सब कुछ कारण-कार्य से बंधा दिखता है। लेकिन परमाणु और उप-परमाणु स्तर पर प्रकृति संभाव्य है यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि “कुछ भी बिना कारण हो सकता है” या “स्वतंत्र इच्छा पूरी तरह क्वांटम अनिश्चितता से आती है”। क्वांटम यांत्रिकी हमें केवल इतना बताती है कि प्रकृति के मूल नियमों में निर्धारणवाद अनिवार्य नहीं है।
अत; कहावत “बिना कारण कोई घटना नहीं होती” शास्त्रीय दुनिया और मोटे पैमाने के लिए सही है। क्वांटम सिद्धांत हमें सिखाता है कि सूक्ष्म स्तर पर कुछ घटनाएँ निर्धारित कारण के बिना, केवल संभाव्यता के नियमों से घटती हैं। दोनों बातें अपने-अपने क्षेत्र में सही हैं। प्रकृति न तो पूरी तरह निर्धारित है, न ही पूरी तरह कानूनहीन। वह संभाव्य नियमों से संचालित एक गहरी, रहस्यमयी व्यवस्था है जहाँ कारण-कार्य का रूप बदल जाता है, लेकिन नियम पूरी तरह गायब नहीं होते है।
उक्त दोनों बातों को हमारे दिनचर्या में हम अनुभव कर सकते हैं।






