मीडिया प्रभारी अल्मोडा़ः दिनेश चन्द्र भट्ट
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अल्मोड़ा लिट फेस्ट 2026 के ‘स्पॉटलाइट सत्र’ में साहित्यकार शैलेश मटियानी के साहित्यिक योगदान पर होगी विशेष परिचर्चा।
अल्मोड़ाः अल्मोड़ा लिट फेस्ट 2026 के आगामी संस्करण में हिंदी साहित्य के शिखर पुरुष और प्रख्यात कथाकार शैलेश मटियानी के अद्वितीय साहित्यिक अवदान पर केंद्रित एक विशेष ‘स्पॉटलाइट सत्र’ (Spotlight Session) का आयोजन किया जाएगा।
इस पैनल चर्चा (परिचर्चा) में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, आलोचक और उनके पारिवारिक सदस्य एक मंच पर एकत्रित होंगे। परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य मानवीय संघर्षों, हाशिए के समाज और बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य के चित्रण में मटियानी जी के लेखन की प्रासंगिकता पर गंभीर विमर्श करना है।
परिचर्चा के मुख्य बिंदु निम्नलिखित होंगे:
• साहित्यिक दर्शन और वैचारिक संघर्ष: सत्र के दौरान मटियानी जी की प्रसिद्ध स्थापनाओं, विशेषकर “लेखक की हैसियत से” के आलोक में उनके इस मूल दर्शन पर चर्चा होगी कि कलात्मक और साहित्यिक संघर्ष ही वास्तव में मनुष्य को मुकम्मल इंसान बनाता है।
• पत्रकारिता और प्रिंट मीडिया का स्वर्णिम युग: पैनलिस्ट उस दौर की पत्रकारिता और कहानी लेखन के इतिहास को रेखांकित करेंगे, जब ‘धर्मयुग’ (टाइम्स ऑफ इंडिया समूह) जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशित होना किसी भी लेखक के लिए सर्वोच्च कीर्ति और गौरव का विषय माना जाता था।
• पारिवारिक एवं अंतरंग संस्मरण: शैलेश मटियानी जी के सुपुत्र राकेश मटियानी इस सत्र में अपने पिता के अनवरत लेखन सफर से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं को साझा करेंगे। वह बताएंगे कि कैसे अत्यंत विषम और विपरीत परिस्थितियों में भी मटियानी जी ने अपनी कलम को रुकने नहीं दिया। इस दौरान उनके प्रमुख उपन्यासों और कृतियों जैसे ‘उपरांत’ और ‘नदी किनारे का गांव’ पर विशेष रूप से प्रकाश डाला जाएगा।
• स्त्री विमर्श और नारी चेतना: प्रख्यात अध्येता अमृता पांडे मटियानी जी के साहित्य में ‘स्त्री विमर्श’ और उनके द्वारा गढ़े गए जटिल महिला पात्रों पर संवाद का नेतृत्व करेंगी। परिचर्चा में उनके प्रसिद्ध उपन्यास “चंद औरतों का शहर” तथा “अद्धांगिनी” जैसी कालजयी कहानियों के माध्यम से ‘शहरी स्त्री’ और ‘ग्रामीण स्त्री’ के अंतर्विरोधों व उनकी सामाजिक स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा।
यह सत्र हिंदी साहित्य जगत को शैलेश मटियानी के यथार्थवाद, अदम्य जीवटता और उनकी रचनाओं की अनूठी भावनात्मक गहराई से पुनः रूबरू कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।






