हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (ऑनरेरी)
अयोध्या उ. प्र.
(नया अध्याय, देहरादून)
वीरगति दिवस (18 अप्रैल)
नायक उत्तम सिंह, वीरगति प्राप्त
हमारी सेना के जवान रोज दो तरफा युद्ध लड़ते हैं। वह अपने साहस और कर्तव्यपरायणता के बल पर दुश्मन से तो आसानी से निपट लेते है लेकिन देश के अलग अलग भूभागों में अलग अलग मौसम और जलवायु से निपटना उनके लिए आसन नहीं होता। वह उस मौसम और जलवायु के आदी भी नहीं होते लेकिन अपने कर्तव्यों के आगे वह सब कुछ सहते हैं। हम अपने घरों में थोडा सा गर्मी बढ़ने या ज्यादा सर्दी होने पर हाय हाय करने लगते है, प्रकृति को कोसने लगते हैं, और भगवान को दोषी ठहराने लगते हैं लेकिन हमारी सीमा पर खड़े जवान न तो प्रकृति को कोसते हैं और न ही भगवान् को दोष देते हैं। यही बात सैनिकों को आम लोगों से अलग करती है। सैनिकों की वीरता केवल युद्धभूमि में ही नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों में भी दिखाई देती है जहाँ पर सैनिक उन प्राकृतिक बाधाओं से टकराते हैं।
सर्दियों में कश्मीर में मौसम पल पल बदलता है। वहां की सर्दी शरीर में कांटे की तरह चुभती है, तेज हवाएं सन सन कर चलती हैं और यह हवाएं रात में और भयानक हो जाती हैं। ज्यादा ऊंचाई वाले स्थानों पर तो आक्सीजन न के बराबर है , दस कदम चलना मुश्किल होता है लेकिन हमारे जवान वहां पर भी दुश्मन की आँख में आँख मिलकर सीना ताने खड़े है। यहाँ पर सर्दियों से भी खतरनाक मौसम गर्मियों का होता है, जब बर्फ पिघलना शुरू होती है। बर्फ पिघलने के साथ ही साथ बर्फ की चट्टानों के खिसकने का हमेशा डर बना रहता है। 18 अप्रैल 2020 को एक ऐसी ही घटना हुई जिसने एक हँसते परिवार की खुशियाँ छीन लीं।
जनपद अमेठी के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के गांव गूंगेमऊ के निवासी नायक उत्तम सिंह अपने गाँव में अवकाश पर आये थे। अपने परिवार के साथ लगभग करीब डेढ़ माह का अवकाश पूरा कर, पुन: जल्दी वापस आने का वादा कर अपनी यूनिट में 15 जनवरी को वापस गए । उनकी यूनिट उस समय कश्मीर के बारामुला जिले के उरी के सीमा क्षेत्र में तैनात थी। 18 अप्रैल को रोज की तरह ही मौसम था। यूनिट के जवान गश्त पर थे। एकाएक हिमस्खलन हुआ जिसमें नायक उत्तम सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए।
नायक उत्तम सिंह का जन्म 20 जून 1985 को श्रीमती साबरमती सिंह और श्री दान बहादुर सिंह के यहाँ हुआ था। उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा जूनियर हाई स्कूल, मुसाफिरखाना तथा हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा ए एच इंटर कालेज, मुसाफिरखाना और बी एस सी की पढाई गणपत सहाय महाविद्यालय सुल्तानपुर से पूरी की। 29 अप्रैल 2005 को वह भारतीय सेना की महार रेजिमेंट में भर्ती हुए और प्रशिक्षण पूरा होने के पश्चात उनकी तैनाती 11 महार रेजिमेंट में हुई। बाद में उनका विवाह जनपद अयोध्या की कुमारी रागिनी सिंह से हुआ।
नायक उत्तम सिंह के परिवार में माता श्रीमती साबरमती सिंह, भाई प्रवीण सिंह, उनकी वीरांगना श्रीमती रागिनी सिंह, पुत्र निर्वाण सिंह तथा पार्थ सिंह हैं। वर्तमान में श्रीमती रागिनी सिंह जिला सैनिक कल्याण कार्यालय अयोध्या में कार्यरत हैं और उनके दोनों बच्चे अयोध्या के एक निजी स्कूल में पढाई कर रहे हैं। नायक उत्तम सिंह के पिता श्री दान बहादुर सिंह की मौत हो चुकी है। नायक उत्तम सिंह की वीरता और बलिदान की याद में उनकी यूनिट 11 महार रेजिमेंट ने उनके वीरगति स्थल पर एक शिला लेख लगवाया है। उनके परिवार द्वारा उनकी वीरता और बलिदान की याद में राष्ट्रीय पर्वों और वीरगति दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
नायक उत्तम सिंह की वीरगति पर लोगों द्वारा उनके सम्मान में कई वादे किये गए थे लेकिन 6 साल बीतने के बाद भी कुछ अधूरे हैं। उनकी वीरांगना श्रीमती रागिनी सिंह ने अपने पति की वीरता और बलिदान को अमर बनाने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन अभी तक कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि यदि उनके गांव की सड़क का नामकरण नायक उत्तम सिंह के नाम पर कर दिया जाए और उस पर एक शौर्य द्वार बनवा दिया जाए तो यह उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इन शौर्य प्रतीकों को देखकर लोगों के बीच एक सकारात्मक सन्देश जाएगा और उनके गांव के आसपास के युवा सेना के प्रति उत्प्रेरित होंगे।






