महिला आरक्षण पर मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 

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पवन वर्मा

 

                    (नया अध्याय, देहरादून)

 

महिला आरक्षण पर मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र 

 

प्रधानमंत्री मोदी के विजन को मिशन बना रहे मोहन यादव

 

 

भारत में महिलाओं को राजनीति में उनका वास्तविक हक दिलाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जहां केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से ऐतिहासिक पहल की नींव 2023 में रखी थी, हाल ही में संविधान संशोधन बिल पारित नहीं होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि वे महिलाओं को हर हाल में आरक्षण दिलाकर रहेंगे। प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव कदम से कदम मिलाकर उनके साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस संकल्प को पूरा करने के लिए मोहन यादव हर स्तर पर संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने भरी गर्मी और तेज-तीखी धूप में सड़क पर महिलाओं के आरक्षण की आवाज बुलंद की। अब मध्य प्रदेश की विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कर वे महिलाओं के हक की आवाज लोकतंत्र के मंदिर में भी पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी में हैं। इधर कांग्रेस दिल्ली से लेकर भोपाल तक महिला आरक्षण को लेकर नकारात्मक रुख अपनाए हुए है।

 

महिलाओं के अधिकार की लड़ाई को जनांदोलन बनाने की कोशिश

 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण केवल एक विधेयक या संवैधानिक प्रावधान नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय का प्रश्न है। इसी सोच के साथ उन्होंने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया है। वे इस विषय को लेकर हर स्तर पर सक्रिय हैं। प्रदर्शन, रैलियां और मार्च के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि महिलाओं को उनका राजनीतिक हक दिलाना अब केवल सरकारी एजेंडा नहीं, बल्कि एक व्यापक जन आंदोलन है।

 

 कांग्रेस का नकारात्मक रूप

 

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लोकसभा में रखे गए तर्क और बयान यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि पार्टी महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील विषय पर ठोस, सकारात्मक और प्रतिबद्ध रुख अपनाने में असहज है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के वक्तव्यों में समर्थन की स्पष्टता से अधिक संशय, शर्तें और आपत्तियां प्रमुख रहीं, जिसने उनके वास्तविक इरादों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह परिदृश्य इस धारणा को बल देता है कि कांग्रेस महिलाओं को व्यापक और निर्णायक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के मुद्दे पर अभी भी द्वंद्व की स्थिति में है। मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस का यही चेहरा सामने आता है। यहां के नेताओं के बयान और राजनीतिक व्यवहार यह दर्शाते हैं कि महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने के बजाय उसे सीमित दायरे में ही रखा गया। वास्तविकता यह है कि प्रदेश कांग्रेस ने वर्षों तक महिला नेताओं को उभरने और निर्णायक भूमिका निभाने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। ऐसे में, जब देश महिला भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में अग्रसर है, कांग्रेस का यह असंगत और नकारात्मक रुख न केवल उसकी राजनीतिक सोच को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि पार्टी अब भी महिला नेतृत्व को लेकर पूर्ण आत्मविश्वास नहीं जुटा पाई है।

 

 विशेष सत्र: 27 अप्रैल को बड़ा राजनीतिक संदेश

मध्य प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाया गया है। यह सत्र अपने आप में यह साबित करता है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर कितनी गंभीर है। इस विशेष सत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की दिशा में मध्य प्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा। इस दिशा में यह सत्र न केवल समर्थन का मंच बनेगा, बल्कि महिला आरक्षण को लेकर राज्य की प्रतिबद्धता को औपचारिक रूप से सामने लाने का अवसर भी होगा। सदन में इस मुद्दे पर व्यापक और विस्तार पूर्वक चर्चा होगी। जिसमें पक्ष-विपक्ष के सदस्य अपनी-अपनी राय रखेंगे। यह राय विधानसभा के इतिहास में दर्ज होगी। साथ ही यह भी इतिहास बनेगा कि महिलाओं को लोकसभा एवं विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विशेष सत्र आहूत करवाया और खुले मन से इस विषय पर पक्ष और विपक्ष के सदस्यों को बोलने का अवसर प्रदान किया।

 

 सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

इस विशेष सत्र के जरिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यह बता रहे हैं कि महिला आरक्षण का प्रभाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर समाज के हर क्षेत्र पर पड़ेगा शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव इस व्यापक प्रभाव को समझते हैं और इसी कारण वे इस मुद्दे को लेकर इतने सक्रिय हैं। उनका मानना है कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगी, तो समाज अधिक संतुलित और न्यायपूर्ण बनेगा। यही संदेश वे इस विशेष सत्र के जरिए प्रदेश भर की जनता को भी देना चाहते हैं।

 मोदी का विजन, मोहन यादव का मिशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन भी महिला आरक्षण को लेकर स्पष्ट है कि वे लोकसभा, विधानसभा में महिलाओं की ज्यादा से ज्यादा भूमिका चाहते हैं। इस विजन को पूरा करने के लिए मोहन यादव प्रदेश में एक मिशन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अभी विधानसभा का विशेष सत्र आहूत किया गया है। इसके बाद वे नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद, जिला पंचायत, जनपद पंचायतों तक इस विषय को लेकर जाने वाले हैं। यानि हर स्तर पर वे महिला आरक्षण दिए जाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को सार्थक करने के मिशन में जुटे हुए हैं। मध्य प्रदेश इस मुद्दे पर एक उदाहरण प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है। विशेष सत्र बुलाना, सड़क पर आंदोलन करना और लगातार इस विषय को उठाना। ये सभी कदम यह दिखाते हैं कि डॉ. मोहन यादव की सरकार इस मुद्दे को लेकर कितनी प्रतिबद्ध है। यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक संदेश है कि वे भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं।

 2029 की चुनौती और संकल्प की दृढ़ता

 

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 106 वां संविधान संशोधन लोकसभा में पारित नहीं हो पाने के कारण यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिलाओं को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इस चुनौती के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। वे महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संकल्पित हैं और किसी भी स्थिति में इस लक्ष्य से पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे इस विषय को मध्य प्रदेश में भी लगातार जीवित और जीवंत रखना चाहते हैं, ताकि यह राष्ट्रीय स्तर पर भी प्राथमिकता बना रहे।

 

 संकल्प से सिद्धि की ओर

नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, लेकिन इसे वास्तविकता में बदलने के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में रास्ता दिखाया है, और मुख्यमंत्री मोहन यादव उस रास्ते पर पूरी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। वे महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर डॉ. यादव ने जो संकल्प और सक्रियता दिखाई जा रही है, वह भारतीय राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है।  (विनायक फीचर्स)

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