राजनीति में स्थाई निष्ठा मिथक या मजबूरी?

Spread the love

 

डॉ. सुधाकर आशावादी

 

            (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

 

राजनीति में स्थाई निष्ठा मिथक या मजबूरी?

 

 

किसी राजनीतिक दल के प्रति स्थाई निष्ठा का प्रश्न हो या किसी निजी व्यापारिक प्रतिष्ठान में स्वामी के मनमाने आदेशों को स्वीकार करते हुए उसकी इच्छानुसार कार्य करने की मजबूरी, स्वतंत्रता का कोई भी पक्षधर किसी व्यक्ति या विचार का बंधुआ नही हो सकता। राजनीति में किसी व्यक्ति या दल के प्रति निष्ठाएँ बदलना नई बात नही है। आया राम गया राम की नीति भारतीय राजनीति में लंबे अरसे से प्रभावी रही है। जब जब भी कोई प्रभावशाली राजनेता दल बदल करता है, तब तब उसे ग़द्दार, विश्वासघाती जैसी संज्ञा प्रदान की जाती है।

 

हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात बड़े नेताओं ने आम आदमी पार्टी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थामा है, दल बदल का असली कारण तो वही बता सकते हैं, लेकिन इतना अवश्य है कि कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति या तो पार्टी में उचित सम्मान न मिलने के कारण दल बदल करता है या किसी व्यक्ति की वैचारिक तानाशाही या दंभ से त्रस्त होकर। आम आदमी पार्टी का इतिहास भी इससे इतर नहीं है। जिस टीम ने राष्ट्र से भ्रष्टाचार दूर करने के उद्देश्य से ईमानदार सुशासन का दावा किया था तथा आडम्बर मुक्त राजनीति का संकल्प लिया था, वह स्वयं सुख सुविधाओं का मोह नही छोड़ सकी। ऐसे में अनेक संस्थापक सदस्यों को समय समय पर पार्टी से अलग कर दिया गया।

 

कटु सत्य यही है कि राजनीतिक चरित्र में अवसरवादिता एवं स्वार्थ पूर्ण सोच निहित रहती है। आम आदमी पार्टी भले ही स्वयं को कितना भी दूध से धुला सिद्ध करने की बात करे, लेकिन राजनीतिक हमाम में सब दलों की स्थिति समान ही है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, आम आदमी पार्टी हो या राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यू हो या अन्य कोई राजनीतिक दल, न जाने कब किस राजनीतिक दल या किस नेता से किसी का मोह भंग हो जाए यह पूर्व निश्चित नहीं होता। किसी भी राजनीतिक दल में व्यक्ति का सम्मान एवं तत्कालीन परिस्थितियाँ प्रभावशाली व्यक्ति के दल बदल की भूमिका तैयार करती है। इसी कारण यदा कदा दल बदल होता रहता है, कोई भाजपा से खिन्न होकर कांग्रेस या आम आदमी पार्टी का दामन थामता है, कोई आम आदमी या कांग्रेस से खिन्न होकर भाजपा की उँगली पकड़ता है। बहरहाल दल बदल रोकने के लिए संविधान में व्यवस्था की गई है। इसके उपरांत भी दल बदल होता है तथा उसका विरोध व समर्थन भी किया जाता है। यह जनता की समझ का विषय है कि वह किसे ग़द्दार मानती है और किसे राष्ट्र भक्त।

 

बहरहाल लोकतंत्र में कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है, कि दल बदल करने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों के दोनों हाथों में लड्डू रहते हैं। ऐसे अनेक उदाहरण हैं, कि अनेक दलों की परिक्रमा करके आने वाले व्यक्तियों को विशेष नामधारी दलों ने मुख्यमंत्री जैसे विशेष पदों पर बिठाकर सम्मानित किया है तथा उन दलों के समर्पित कार्यकर्ताओं के हिस्से में केवल जनसभाओं में दरियाँ या कुर्सियाँ बिछाने का ही दायित्व आया है।

(विनायक फीचर्स)

  • Related Posts

    फिरोजपुर में सफाई कर्मचारीयों की तरफ से आज 10 वे दिन भी किया रोष प्रदर्शन 

    Spread the love

    Spread the love  ब्यूरो फिरोजपुरः राजीव कुमार           (नया अध्याय, देहरादून)   https://www.transfernow.net/dl/20260515tVuqkwT5       STORY SLUG : FEROZEPUR SAFAYI EMPLOYEE PROTEST 10 DAYS   …

    नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 15 से 25 मई तक प्राप्त किए जाएंगे

    Spread the love

    Spread the love  संवाददाता आगर-मालवा: गोवर्धन कुम्भकार                 (नया अध्याय, देहरादून)     नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची का…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    फिरोजपुर में सफाई कर्मचारीयों की तरफ से आज 10 वे दिन भी किया रोष प्रदर्शन 

    • By User
    • May 15, 2026
    • 5 views
    फिरोजपुर में सफाई कर्मचारीयों की तरफ से आज 10 वे दिन भी किया रोष प्रदर्शन 

    नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 15 से 25 मई तक प्राप्त किए जाएंगे

    • By User
    • May 15, 2026
    • 10 views
    नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 15 से 25 मई तक प्राप्त किए जाएंगे

    दो पक्षों में खूनी संघर्ष कुल्हाड़ी से हमला

    • By User
    • May 15, 2026
    • 11 views
    दो पक्षों में खूनी संघर्ष कुल्हाड़ी से हमला

    मेघदूत की नाट्य प्रस्तुति चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प का मंचन दून में रविवार को।

    • By User
    • May 15, 2026
    • 5 views
    मेघदूत की नाट्य प्रस्तुति चंद्रप्रभा का अटूट संकल्प का मंचन दून में रविवार को।

    ऊखीमठ में फिर रुकवाया गया एक बाल विवाह, प्रशासन और पुलिस की तत्परता से बचा नाबालिग का भविष्य।

    • By User
    • May 15, 2026
    • 4 views
    ऊखीमठ में फिर रुकवाया गया एक बाल विवाह, प्रशासन और पुलिस की तत्परता से बचा नाबालिग का भविष्य।

    सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन। 

    • By User
    • May 15, 2026
    • 11 views
    सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का पूर्णाहुति के साथ समापन।