नवीन डिमरी ‘बादल’
‘सरस्वती सदन’, डिम्मर (सैण)
सिमली, चमोली (उत्तराखंड)
(नया अध्याय, देहरादून)
गजल
दर्द तेरी बात ने ऐसा दिया है यार,
चुभ गई है दिल में जैसे कोई पैनी खार।
दिल ने लाखों बार तुझको भूलना चाहा मगर,
याद आता ही रहा तू हर घड़ी हर बार।
तू नहीं तो हर खुशी भी अजनबी लगने लगी,
जैसे बिन सावन के सूना रह गया संसार।
प्यार में तेरे कभी दिखती नहीं कोई कमी,
ज़िंदगी लगने लगी जैसे नई इक बहार।
रात भर जागा किए तेरी यादों के ही साथ,
नींद आई भी तो आँखों में लिए अंगार।
लोग कहते हैं भुला दो बीती बातों को मगर,
कैसे भूलूँ वो निगाहें, वो हँसी, वो प्यार।
वक़्त भी ना भर सका दिल के पुराने ये निशाँ,
जैसे सीने में छिपा हो दर्द का भंडार।
गम की बरसातों में भी मुस्कुराता है ‘बादल’,
लोग कहते हैं गजब का हौसला है यार।
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