संवाददाता : दीप सिंह, कन्नौज (उ.प्र.)
(नया अध्याय, देहरादून)
खुशियों की दहलीज पर मौत का सन्नाटा
जमीन की रजिस्ट्री की खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदली, टेलर की निर्मम हत्या से दहला कन्नौज
कभी-कभी जीवन ऐसे निर्मम मोड़ पर आ खड़ा होता है, जहां खुशियों की रोशनी अचानक दर्द के अंधेरे में खो जाती है। कन्नौज के शेखाना मोहल्ले में घटी एक हृदयविदारक घटना ने यही सच्चाई एक बार फिर सामने ला दी। नई जमीन खरीदने का सपना संजोए एक मेहनतकश टेलर की खुशियां उस समय हमेशा के लिए थम गईं, जब जश्न का माहौल कुछ ही क्षणों में मौत के मातम में बदल गया।
मृतक निजामुद्दीन पेशे से टेलर थे और अपनी मेहनत व सादगी के लिए मोहल्ले में पहचाने जाते थे। बताया जाता है कि उन्होंने एक दिन पूर्व ही जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। अपने जीवन की इस बड़ी उपलब्धि से वह बेहद उत्साहित थे और उसी खुशी में मोहल्ले के लोगों व परिचितों को मिठाई बांट रहे थे। किसी ने शायद यह कल्पना भी नहीं की होगी कि यह खुशी उनकी जिंदगी का आखिरी उत्सव साबित होगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब निजामुद्दीन एक पड़ोसी के घर मिठाई देने पहुंचे, तभी किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। मामूली विवाद अचानक हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि आरोपी ने गमछे से उनका गला दबा दिया और बेरहमी से घसीटते हुए उनकी हत्या कर दी। घटना की क्रूरता ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
घटना के बाद शेखाना मोहल्ले में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस द्वारा घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर जांच प्रारंभ कर दी गई है।
प्रारंभिक जानकारी में आरोपी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू को गंभीरता से परख रही है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि उन सपनों की भी हत्या है, जिन्हें एक आम इंसान ने अपनी मेहनत और उम्मीदों से सजाया था।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है। समाचार लिखे जाने तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी।
यह घटना समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न भी छोड़ जाती है—क्या मामूली विवाद अब इतनी भयावह परिणति तक पहुंचने लगे हैं? क्या इंसानी संवेदनाएं क्षीण होती जा रही हैं? शेखाना मोहल्ले की यह घटना केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देने वाली त्रासदी बन चुकी है।






