मीडिया प्रभारीः सुनील चिंचोलकर
(नया अध्याय, देहरादून)
लेखक – दिव्येश पटेल
कक्षा – तीसरी ‘अ’
विद्यालय – बाल भारती पब्लिक स्कूल, सीपत (बिलासपुर)
शतरंज प्रतियोगिता का एक यादगार दिन
नमस्कार! मेरा नाम दिव्येश पटेल है। मैं सात वर्ष का हूँ और बाल भारती पब्लिक स्कूल में कक्षा तीसरी का छात्र हूँ। शतरंज मेरा सबसे प्रिय खेल है और मुझे इसे खेलना बहुत अच्छा लगता है। हाल ही में मुझे जांजगीर में आयोजित एक शतरंज प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिला। मैं अपने परिवार के साथ कार से वहाँ पहुँचा। रास्ते में एक बंद रेलवे फाटक मिला, जहाँ हमें कुछ समय रुकना पड़ा मैंने वहॉं एक साथ आठ रेलगाड़ियों को गुजरते हुए देखा। यह मेरे लिए एक बिल्कुल नया और रोमांचक अनुभव था। मैंने पहली बार एक साथ इतनी सारी ट्रेनें देखीं, जिससे मैं बहुत उत्साहित हो गया। जब मैं प्रतियोगिता स्थल पर पहुँचा, तो देखा कि वहाँ दूर-दूर के जिलों से कई खिलाड़ी आए हुए थे। सभी प्रतिभागी उत्साह औरआत्मविश्वास से भरे हुए थे। मैंने भी पूरे मनोयोग और लगन के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया।
मैंने अंडर-10 वर्ग में खेला और अच्छे प्रदर्शन के साथ जीत हासिल की। यह मेरे लिए बहुत खुशी और गर्व का क्षण था।इस अनुभव से मैंने सीखा कि हमें जीत और हार दोनों को समान रूप से स्वीकार करना चाहिए। हार हमें नई सीख देती है और जीत हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।यह प्रतियोगिता मेरे जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बन गई है, जिसे मैं हमेशा याद रखूँगा।






