कोलकाता में जघन्य दुष्कर्म मामले में घिरी सरकार, न्याय की उम्मीद में सड़को पर उतरें डॉक्टर।

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पंकज सीबी मिश्रा, राजनीतिक विश्लेषक एवं पत्रकार जौनपुर       यूपी। 

कोलकाता में जघन्य दुष्कर्म मामले में घिरी सरकार, न्याय की उम्मीद में सड़को पर उतरें डॉक्टर।

                     डॉ मौमिता देबनाथ रेप और हत्याकांड मामले में कोलकाता सरकार की लापरवाही नें ममता सरकार का अमानवीय चेहरा एक बार फिर सबके सामने ला दिया जिसके बाद अब पश्चिम बंगाल समेत देश भर के डॉक्टरों नें मोर्चा खोल दिया है। एक पीड़ित परिवार के दुःखो में साथ देने के बजाय उसके विरोध में टीएमसी कार्यकर्ता और पदाधिकारी जो कुकृत्य कर रहें पश्चिम बंगाल में वह बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। कोलकाता रेप केस के बारे में जो खुलासे हुए उससे स्तब्ध हूँ। घटना की वीभत्सता सुन कर सत्य कहूँ तो कांप उठा । आप भी अगर सोशल मिडिया रिपोर्ट पढ़ेंगे तो वही दशा होगी। इससे अधिक क्रूरता क्या ही होगी ? गला काटने से होने वाली पीड़ा से हजार गुनी अधिक पीड़ा दी गयी उस लड़की को और बलात्कार तो ऐसी दुर्दांत घटना है जिसे सोच लें तो रोआं सिहर उठेगा।मृतका के परिवार वाले जीवन भर तड़पते रहेंगे, हर क्षण मरेंगे। जब उन्हें अपनी डॉक्टर बेटी याद आएगी, वे मृत्यु की पीड़ा से तड़पेंगे बच्ची को मिली उस नरकीय यातना को याद कर कर के रोयेंगे। ऐसे में उन अपराधियों को बचाने वालों का जमीर उन्हें धिक्कारेगा। दरिंदो नें केवल एक लड़की को नहीं, उसके पूरे परिवार बल्कि पूरे समाज को मारा है। अपराधी के मोबाइल में अश्लील फिल्मों की क्लिप भरी हुई मिली । उसे नशा था यह सब देखने का। एक अपराधी अपने घर में बैठे दारू पीता है, अश्लील फिल्में देखता है, अपने आप को पशु बना लेता है, और एक दिन मौका मिलते ही किसी परिवार को उजाड़ फेंकता है। आप करते रहिए बौद्धिकता की बातें, कोई नर पिशाच आएगा और अपने फुहड़ थुथुन से आपकी आत्मा को मार देगा। मुझे अनेक मित्रों ने कहा, इस विषय पर लिखिये ताकि समाज ऐसे लोगो और निकम्मी सरकार के विरुद्ध खड़े हो मृतका को न्याय दिलाये । मैं सोच सोच कर हैरान हुए जा रहा हूँ, क्या होगा मेंरे लिखने से ? डेढ़ दशक से भारत समेत दिल्ली में ऐसे कांड तो बहूदा देखने को मिलते रहें खूब लिखा पर हुआ क्या बस कैण्डल मार्च ! क्या उखाड़ लेंगे हम लिख कर? एक परिवार फूलों की तरह सम्भाल कर पालता है अपनी बेटी को, उसे पढा लिखा कर काबिल बनाता है, और एक दिन कोई बर्बर अपराधी आता है और हम समाचारों में पढ़ते है।

सोशल मीडिया में एक दो नहीं, हजारों मतान्ध लोग हैं जो उस लड़की के लिए भी गन्दी गन्दी गालियां लिख रहे हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि उनकी पसंदीदा सरकार की आलोचना हो रही है, तो वे उस लड़की को ही गन्दी गन्दी गालियां दे कर बात बराबर कर रहे हैं। सोचिये ! पकड़ा गया अपराधी अश्लील फ़िल्म देखने का आदी है। वह अकेला इस नशे का आदी नहीं है, इस देश में ऐसे करोड़ों युवक हैं जिनकी मोबाइल में केवल यही भरा है। वह देखने के बाद वे हर लड़की को नोच लेने वाली दृष्टि से ही देखते हैं। उन्हें जब मौका मिल जाय, वे नोच लेंगे। पर उन्हें पूरी छूट है। वे जो मन करे वह देखें और उसके बाद पशु बन कर नोंचते फिरें। अभी कोई आएगा और पोर्न देखने को अपना अधिकार बता देगा। मुझे पिछड़ा बताते हुए घोषित कर देगा कि इसका उससे कोई सम्बंध नहीं। उसे केवल अपने अधिकार की चिन्ता है, उसे इस भयावह महामारी की कोई चिन्ता नहीं। उस लड़की ने इनका क्या बिगाड़ा है ? वह तो इन्हें जानती तक नहीं थी। वह पोस्ट उस डॉक्टर बेटी के परिवार तक पहुँचे तो उन्हें कैसा लगेगा? ये लोग उस अपराधी से जरा भी कम गुनाहगार नहीं। आपको याद होगा, दिल्ली रेप कांड वाली घटना के बाद पूरा देश आंदोलित था। हजारों लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे। फिर भी कुछ नहीं बदला। कभी सोचा है क्यों? क्योंकि इस देश का बौद्धिक वर्ग कभी इस विषय पर चर्चा नहीं कर सका कि इस बीमारी के बढ़ने का मूल कारण क्या है और इसे कैसे रोका जाएगा। जब चर्चा होती है तो सरकार को गाली वाली दी जाती है और खानापूर्ति हो जाती है। इस पार्टी के शासन में कांड हो तो उस पार्टी वाले आंदोलन करते हैं, उस पार्टी के शासन में हो तो इस पार्टी वाले हुड़दंग करते हैं। इससे अधिक कभी बात नहीं हुई। इस अपराध के बढ़ने के दर्जनों कारण होंगे, हम आज तक उसकी पहचान नहीं कर सके। हम कारणों पर बात ही नहीं करना चाहते। हम इसपर भी बात करना नहीं चाहते। हम बस हल्ला कर के चुप हो जाते हैं। वर्तमान सरकार नें ज़ब सभी अश्लील साइट्स को बंद करने का प्रावधान लाई तो एकाएक देश के बुद्धिजीवी और आरक्षणजीवी टूट पड़े। अश्लील फ़िल्म देखने को अपना अधिकार बताने लगे। बाबा साहेब के संविधान की दुहाई देने लगे। देश के लिए शर्म करने का समय है। मै डॉक्टरों के न्याय मांगने के समर्थन में खड़ा हूँ। आप भी आज खुलकर पश्चिम बंगाल के आतंक के सामने खड़े होइए।

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