संस्मरण 17

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राजेंद्र रंजन गायकवाड

(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) 

मैनपाट, छत्तीसगढ़

 

              (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

                       संस्मरण 17

 

जब भी मैं मैनपाट सरगुजा आता हूं तो समझ आता है कि प्रकृति ही जीवन का मूल स्रोत है। पेड़-पौधे, नदियाँ, पहाड़, सूर्य, चंद्रमा, हवा और मिट्टी ये सभी मिलकर हमें जीवित रखते हैं। यदि प्रकृति न होती तो न तो ऑक्सीजन होती, न जल, न भोजन और न ही जीवन। इसलिए यह कहना पूर्णतः सत्य है कि “यदि प्रकृति से जीवन है तो हम अपने जीवन को भी प्राकृतिक बनाएँ।

प्राकृतिक जीवन का अर्थ है सरलता, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने कई बार प्रकृति को भुला दिया है। प्लास्टिक, प्रदूषण, जंक फूड और अत्यधिक भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए हम अपने स्वास्थ्य, शांति और खुशी को खो बैठे हैं। जबकि प्रकृति हमें सिखाती है कि सच्चा सुख सरलता में है। सूर्योदय के साथ उठना, शुद्ध हवा में साँस लेना, मौसमी फल-सब्जियाँ खाना, नियमित व्यायाम करना और प्रकृति के बीच समय बिताना ये सभी बातें हमें स्वस्थ और प्रसन्न रखती हैं। मैनपाट में अनेक झरने/ जलप्रपात के साथ साथ जलजली, बिसरा पानी, जल परी के साथ ही फिश प्वाइंट और टाइगर पॉइंट अद्भुत पिकनिक स्पॉट हैं।

प्रकृति के भ्रमण के बाद समझ आता है कि नियम बहुत स्पष्ट और न्यायसंगत हैं जैसे दिन के बाद रात आती है, गर्मी के बाद सर्दी आती है, उसी प्रकार हमारे जीवन में भी उतार-चढ़ाव आते हैं। प्रकृति हमें सिखाती है कि धैर्य रखो, संतुलन बनाए रखो और अहंकार न करो। वृक्ष हमें बिना किसी स्वार्थ के छाया और फल देते हैं। नदियाँ बिना थके बहती रहती हैं। सूर्य बिना किसी भेदभाव के सबको प्रकाश देता है। यदि हम इन नियमों का पालन करें परोपकार, निरंतर प्रयास, निष्पक्षता और संतुलन तो हमारा जीवन भी सुंदर और खुशहाल बन जाएगा। मैनपाट में तिब्बती संस्कृति के रमणीक बौद्ध विहार हैं।

खुशहाल जीवन का रहस्य कृतज्ञता में छिपा है। हर सुबह जब हम आँख खोलते हैं तो सबसे पहले प्रकृति को धन्यवाद दें। शुद्ध हवा के लिए, पीने के जल के लिए, भोजन के लिए, सूर्य की रोशनी के लिए और जीवन देने वाली इस धरती के लिए। जब हम हर पल प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, तो मन में सकारात्मकता आती है। आभार व्यक्त करने से हम अहंकार से मुक्त होते हैं और दूसरों के प्रति भी दयालु बनते हैं।

आज पर्यावरण संकट गहरा रहा है। वनों की कटाई, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन हमें चेतावनी दे रहे हैं कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा। इसलिए हमें न केवल अपने जीवन को प्राकृतिक बनाना है, बल्कि प्रकृति की रक्षा भी करनी है। पेड़ लगाएँ, जल बचाएँ, प्लास्टिक का उपयोग कम करें और प्रकृति के प्रति सम्मान रखें।

अंत में, मुझे लगता है कि प्रकृति हमारी माँ है। वह हमें जीवन देती है, पोषण देती है और जीना सिखाती है। यदि हम उसके नियमों का पालन करें, सरल और संतुलित जीवन जिएँ तथा हर पल उसे धन्यवाद दें, तो हमारा जीवन न केवल स्वस्थ और खुशहाल होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सुंदर धरती छोड़ पाएँगे।

मैनपाट सरगुजा आकर संकल्प लें प्रकृति से प्रेम करें, उसके नियमों का पालन करें और हर साँस के साथ उसे धन्यवाद दें। क्योंकि सच में, प्रकृति ही जीवन है।

 

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