मुखड़ा

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चन्द्रमती चतुर्वेदी (चन्दू)

  बस्ती, अयोध्या धाम

 

 

             (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

 

                        मुखड़ा

 

सावन बरसे, नयना तरसे, आये न पिहवा मोर,

भीगे तन-मन, भीगे अँखियाँ, आये न पिहवा मोर।

 

 

घिर-घिर आये काले बदरा, दामिन दमके जोर,

बिरहा की ज्वाला धधक उठी, टूटे मन के छोर।

कोयल कूके, पपीहा बोले, नाचे वन का मोर,

सावन बरसे, नयना तरसे, आये न पिहवा मोर।

 

 

झूला डाले अमवा डारी, गाएँ सखियाँ गीत,

सूनी मेरी सेज पड़ी है, रूठे सारे मीत।

कंगन, बिंदी, पायल, बिछुए, पूछें हर इक भोर,

सावन बरसे, नयना तरसे, आये न पिहवा मोर।

 

 

मेहँदी रचकर बैठी कब से, देखूँ तेरी राह,

एक झलक को तरस रही हैं, मेरी दोनों चाह।

साँस-साँस में तेरा नाम है, धड़के दिल का छोर,

सावन बरसे, नयना तरसे, आये न पिहवा मोर।

 

 

आ जा प्रीतम, देर न करना, टूटे न विश्वास,

तेरे बिन यह सावन सूना, सूनी हर मधुमास।

‘चन्द्रमती’ की यही पुकार है, सुन ले नंदकिशोर,

सावन बरसे, नयना तरसे, आये न पिहवा मोर।

 

 ************************

             

                मुखड़ा

 

बात न हो, न मुलाक़ात हो, फिर भी कहानी,

दिल की बातें दिल तक पहुँचे, प्रीत पुरानी।

तेरी धड़कन मेरी धड़कन संग मुस्काए,

बिन बोले ही प्यार हमारा रंग लाए॥

 

अंतरा – 

 

जब-जब तुझको याद करूँ, पायल बजती,

मन की सूनी डाली पर खुशियाँ सजती।

हवा तेरे आँचल की खुशबू ले आए,

भीगी-भीगी रात मुझे फिर गुनगुनाए।

दूर रहकर भी तू लगता पास सुहानी,

दिल की बातें दिल तक पहुँचे, प्रीत पुरानी॥

 

अंतरा – 

 

चाँद गगन में देख तुझे ही मुस्काता,

हर तारा तेरा नाम लिए इतराता।

बिन चिट्ठी, बिन संदेशा, प्यार निभाएँ,

नैनों वाले ख़्वाब स्वयं ही मिल जाएँ।

रब ने लिख दी जैसे अपनी प्रेम कहानी,

दिल की बातें दिल तक पहुँचे, प्रीत पुरानी॥

 

अंतरा – 

 

जनम-जनम का साथ रहे, ऐसी दुआ है,

तेरे बिन तो हर मौसम भी जैसे खफा है।

साँस-साँस में तेरा नाम ही बस जाए,

जीवन का हर गीत तुझे ही दोहराए।

तू ही मेरी धड़कन, तू ही जिंदगानी,

दिल की बातें दिल तक पहुँचे, प्रीत पुरानी॥

 

 

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