संजय सोंधी
(संयुक्त निदेशक)
शिक्षा निदेशालय, दिल्ली सरकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
हवा में झूला और ‘हाई’ फ्लाई महाराज!
थाईलैंड का फुकेट शहर लोग इसलिए जाते हैं ताकि समुद्र किनारे नारियल पानी पीकर जीवन की सारी टेंशन भूल सकें, लेकिन हमारे एयर इंडिया के कैप्टन साहब ने सोचा कि फुकेट का खुमार केवल जमीन तक क्यों सीमित रहे, इसे 35,000 फीट की ऊंचाई पर बादलों के बीच भी आजमाया जाना चाहिए! फिर क्या था, फुकेट से नई दिल्ली आ रहे विमान में सवार 137 यात्रियों को बिना किसी एक्स्ट्रा किराए के ‘वंडरला’ और ‘डिज्नीलैंड’ के रोलर कोस्टर का वो रोमांचक थ्रिल मिला, जिसकी उन्होंने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी।
जैसे ही प्लेन ने भारतीय सीमा में कदम रखा, कैप्टन साहब को शायद लगा कि विमान में सन्नाटा कुछ ज्यादा ही हो गया है और माहौल को थोड़ा ‘लाइट’ करने की जरूरत है। बस फिर क्या था, उन्होंने बिना किसी पूर्व चेतावनी के हवाई जहाज को अचानक 300 से 400 फीट नीचे पटक दिया! हवा में ऐसा हिचकोला आया कि जो यात्री मजे से अपने जूस और सैंडविच का आनंद ले रहे थे, उनके जूस उड़कर पड़ोस में बैठे सज्जन के कुर्ते पर जा गिरे। कई यात्री सीट से सीधे छत से जा टकराए और अचानक बिना गुरुत्वाकर्षण (जीरो-ग्रेविटी) के अंतरिक्ष यात्री बनने का अनुभव लेने लगे। कुछ पलों के लिए तो यात्रियों को लगा कि एयर इंडिया अब ‘फ्री-फॉल’ सर्विस भी देने लगी है।
प्लेन के दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंड करने के बाद जब सहमे हुए यात्रियों ने कैप्टन साहब को देखा, तो उनके चलने की शैली और बोली-भाषा देखकर सबको दाल में कुछ काला लगा। जांच-पड़ताल और डोप टेस्ट का दौर शुरू हुआ तो मामला बिल्कुल साफ हो गया। पता चला कि हमारे कैप्टन साहब तो खुद ‘हाई’ होकर उड़ रहे थे और उनके ऊपर मारिजुआना यानी गांजे का खुमार सवार था! जनता यह सोचकर हैरान थी कि पायलट साहब विमान के ऑटो-पायलट बटन को दबाने के बजाय खुद ही ‘फुल ऑटो-मोड’ में चले गए थे।
अब इसे एविएशन सेक्टर का नया ‘रिफ्रेशमेंट मॉडल’ कहें या चमत्कार, कि नशे में झूमते कैप्टन के हाथों से निकलकर सह-पायलट ने जैसे-तैसे प्लेन को संभाला और लोगों को धरती पर सही-सलामत वापस उतारा। जो लोग कहते थे कि एयर इंडिया में अब पहले जैसी बात नहीं रही, उन्हें समझ जाना चाहिए कि अब एयर इंडिया आपको सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर नहीं पहुंचाती, बल्कि सीधे मोक्ष और रोमांच की ऐसी यात्रा कराती है जहां डर के आगे वाकई जीत (और नीचे उतरने की प्रार्थना) होती है!
इस घटना ने यात्रियों को एक बहुत ही बहुमूल्य सबक भी सिखा दिया है। अब से जब भी आप फुकेट से दिल्ली की फ्लाइट में बैठें, तो केवल सीटबेल बाँधना काफी नहीं होगा, बल्कि अपनी जेब में दो-चार हनुमान चालीसा, एक हेलमेट और मन में ढेर सारा धैर्य रखना बेहद जरूरी होगा। क्योंकि आपको क्या पता कि कॉकपिट में बैठा पायलट प्लेन चला रहा है या अपनी ही दुनिया के किसी अलग ही ‘हाइवे’ पर फुल स्पीड में सफर कर रहा है!







