सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका, शिक्षिका
रिपोर्टर, उद्घोषिका, नवापारा-राजिम
रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
प्रतिदिन कुछ नया सीखते-करते रहो!
: सुश्री सरोज कंसारी
=======================
जीवन में आशा, धैर्य और सादगी का बड़ा महत्व है, हालांकि इस संसार में हर इंसान का सरल होना मुश्किल है, फिर भी सरलता, सादगी और धैर्य व संतोष से हर पल को खुलकर जीना चाहिए; संसार वैसा ही है जैसा तुम देखते हो, तुम खुद को शांत रखोगे तो तुम्हारे भीतर एक रोशनी और चेतना जागी रहेगी, और आशा की वही किरण हमें कभी निराश नहीं होने देती। खुलकर हंसना और खुलकर अपना किरदार निभाते रहना चाहिए, सभी के प्रति संवेदनशील बने रहकर सद्भावना बनाए रखना चाहिए।
मनुष्यों! हृदय में आशा
और सद्भावना बनाए रखो।
सीखो, गाओ, हँसो, बढ़ो,
परन्तु अपने हृदय में
संवेदना हमेशा जीवित रखना।
संवेदनशीलता, सहनशीलता और क्षमा करने वाले गुण को अपनाना चाहिए। संसार में आज अन्याय ज़्यादा है, सद्भावना की कमी है, इसलिए सद्भावना का घर लोगों के हृदयों में बनाना है। लोगों को मानवता और विश्व-बंधुत्व का पाठ पढ़ाना चाहिए और हृदय से बैर, ईर्ष्या, द्वेष और सभी नकारात्मकता को मिटाने के लिए निरंतर प्रयत्न करते रहना चाहिए। जीवन में हमेशा आशा, सादगी और सद्भावना को अपनाकर रहना चाहिए, इससे जीवन स्वयं ही सुंदर बना रहता है।
हमारा स्वभाव शांत और सहज बना रहना चाहिए। यदि कोई ईर्ष्यालु, असामाजिक प्रवृत्ति के लोग कुछ भी कहें, तो हमें उससे कोई असर नहीं लेना चाहिए। अपने कर्म-पथ पर चलते रहना चाहिए, हर दबाव और हर चिंता को छोड़कर। हँसते-मुस्कुराते हुए रोज़ कुछ नया सीखना है और करते जाना है, क्योंकि यह जीवन मंज़िल नहीं, बस एक अंतहीन यात्रा है। मनुष्य को जीवन के हर रंग में अपनी बुनियादी इंसानियत, दूसरों के प्रति दया और करुणा की भावना को हमेशा बनाए रखना चाहिए। आज मानवता का महत्व समझाने का प्रयास करने की आवश्यकता है।






