सुश्री सरोज कंसारी
(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)
रिपोर्टर एवं उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
दिलों से गर दिल के तार जुड़ जाएं
: सुश्री सरोज कंसारी
”रिश्ते भी पौधे जैसे होते हैं!”
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रिश्तों की इस दुनिया में हजारों रिश्ते बना लेना कोई बड़ी बात नहीं। अगर एक-दूसरे के लिए दिल नहीं धड़कता तो वह रिश्ता बेजान है, सिर्फ नाम का है। ऐसे रिश्ते जिनके रहने से हर पल बोझिल प्रतीत हो, उनके साथ ज्यादा दूर तक चल पाना कठिन होता है, जबकि दिल से जुड़े रिश्ते ही ज़िंदगी को खूबसूरत बनाते हैं।
जब अपने हैं तो उनके होने का एहसास होना जरूरी है, अपनों के होते हुए भीतर से तन्हा होना उस रिश्ते को महत्वहीन बना देता है। किसी को दिल से अपना मान लेने से उसकी खुशियाँ और गम अपने हो जाते हैं, और एक बार दिल के सच्चे तार जुड़ जाएं तो टूटने का कोई कारण नहीं रहता। भीड़ मायने नहीं रखती, मायने रखती है प्यार की गहराई और अपनापन। कोई पास होकर भी दिल में न हो तो वह हर पल दर्द देता है, पर जहाँ सच्चा प्रेम होता है वहाँ दूर-पास से फर्क नहीं पड़ता। वही प्रेम साथ निभाने, गम भुलाने, गलतियों को माफ करने और परवाह के साथ चलने के लिए प्रेरित करता है।
रिश्तों की इस भीड़ में अगर दिल से जुड़े रिश्ते पास हैं तो हर लम्हा सुखद है, किसी के साथ होने का एहसास ही जीने का उद्देश्य, उत्साह और सपने देता है, इसलिए जब किसी से दिल का तार जुड़ जाए तो उसे दिल में ही सहेज कर संभाल कर रखिए। दिल में सच्ची भावनाएँ हों तो सारे शिकवे-गिले दूर हो जाते हैं, इसलिए रिश्ते को बनाए रखने के लिए अहंकार छोड़िए, सच कहिए, निस्वार्थ प्रेम दीजिए और दिखावे से दूर रहिए, क्योंकि एक-दूसरे के लिए दिल का धड़कना ही ज़िंदगी की खूबसूरती है।
आज सबसे बड़ी आवश्यकता है तो वह है – कद्र करने की। रिश्ते भी एक नन्हे पौधे की तरह होते हैं। जैसे हम एक पेड़ लगाते हैं तो उसे रोज पानी देते हैं, धूप से बचाते हैं, तभी वह हरा-भरा रहता है और जीवित रहता है। पर जैसे ही हम उसकी देखभाल करना बंद कर देते हैं, वह धीरे-धीरे मुरझाकर सूख जाता है। ठीक वैसे ही रिश्ते भी हैं। जब तक हम एक-दूसरे की कद्र करते हैं, समय देते हैं, परवाह करते हैं, तभी तक रिश्ते में हरियाली बनी रहती है। कद्र करना बंद, तो रिश्ता खत्म। इसलिए यदि कोई अपना आपके पास है, तो उसकी कद्र कीजिए, इससे पहले कि देर हो जाए।






