राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
गजल
ऐसी कोई बात नहीं जो भुलाई न जाए,
सागर की लहरें सब कुछ धो जाती हैं।
जो यादें दिल में गहरी थीं जिंदगी भर,
धीरे-धीरे बादलों-सी उड़ जाती हैं।
ऐसा कोई जख्म, ऐसा कोई दर्द नहीं,
वक़्त की दवा से हर चोट भर जाती है।
भूलने की शक्ति ही इंसान की ताकत है,
यादों का बोझ कैसे दुनिया सह जाती है।
जो पल बचे हैं, जतन से जी लीजिए ‘रंजन’,
सारी कमाई, सारी चीजें यहीं रह जाती हैं।






