संवाददाता कन्नौज (उ. प्र.): दीप सिंह
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
छह साल इंतजार के बाद ग्रामीणों ने खुद उठाया फावड़ा।
नहर किनारे बदहाल रास्ते पर सरकारी इंतजाम बेअसर, विद्यार्थियों की जान जोखिम में; गड्ढे भरकर ग्रामीणों ने दिया व्यवस्था को आईना।
हसेरन/कन्नौज: छह साल से सड़क बनने का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने आखिरकार सरकारी व्यवस्था का भरोसा छोड़कर खुद ही फावड़ा उठा लिया। हसेरन विकासखंड की ग्राम पंचायत कंसुआ के मजरा मझपुर्वा में नहर किनारे बदहाल पड़े रास्ते पर ग्रामीणों ने श्रमदान कर गड्ढे भरे और मिट्टी डालकर रास्ते को चलने लायक बनाने का प्रयास किया। यह तस्वीर केवल सड़क की बदहाली नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित समस्या को लेकर ग्रामीणों की बढ़ती नाराजगी भी बयां कर रही है।
मझपुर्वा से हैड पुल तक जाने वाला रास्ता वर्ष 2019 से बदहाल बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार नहर चौड़ीकरण के दौरान रास्ता क्षतिग्रस्त हुआ था। इसके बाद स्थायी मरम्मत नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती गई। बारिश आते ही यही रास्ता गहरे गड्ढों, कीचड़ और पानी से भर जाता है। नहर का पानी सड़क पर आने से हालात और खराब हो जाते हैं।
सबसे गंभीर स्थिति स्कूली बच्चों की है। ग्रामीणों के मुताबिक प्रतिदिन 100 से अधिक छात्र-छात्राएं इसी रास्ते से खड़िनी कस्बे में पढ़ने जाते हैं। नहर किनारे संकरे और बदहाल रास्ते पर फिसलने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का दावा है कि कई बार बच्चे फिसलकर नहर की ओर जा चुके हैं और कुछ विद्यार्थी नहर में गिरने से बाल-बाल बचे। किताब-कॉपियां और स्कूल ड्रेस खराब होना तो आम बात है, जबकि चोट लगने की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
समस्या से परेशान ग्रामीणों ने अब इंतजार के बजाय खुद समाधान की कोशिश शुरू कर दी। फावड़े लेकर गड्ढों में मिट्टी डाली गई और रास्ते को समतल किया गया। नहर किनारे उगी झाड़ियों और घास की भी सफाई की गई, ताकि साइकिल और बाइक से आने-जाने वालों को कुछ राहत मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी मिट्टी भरने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्हें मजबूत सड़क चाहिए, ताकि बारिश के मौसम में भी आवागमन बाधित न हो और विद्यार्थियों को नहर किनारे जोखिम उठाकर स्कूल न जाना पड़े।
ग्रामीणों का श्रमदान अब प्रशासन के लिए सवाल बनकर खड़ा है—जब वर्षों से सड़क नहीं बनी तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है? ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराकर मझपुर्वा से हैड पुल तक स्थायी सड़क निर्माण और नहर किनारे सुरक्षा के इंतजाम कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा और आगामी विधानसभा चुनाव में सड़क की बदहाली को प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा।


श्रमदान में महेश चंद्र, कमल सिंह, शिवप्रताप सिंह, राजकुमार, प्रदीप कुमार, वीरेश कुमार, महाराज सिंह, पप्पू राजपूत, अर्चना, उमेश कुमार, कल्लू वर्मा, जयपाल सिंह समेत दो दर्जन से अधिक ग्रामीण मौजूद रहे।







