राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
भारत में वैज्ञानिक सोच
(लेख)
वैज्ञानिक स्वभाव या Scientific Temper विकसित करने के मुख्य तरीके शिक्षा, परिवार, समाज, मीडिया और नीति स्तर पर बदलाव से जुड़े हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(h) में हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है कि वह वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद तथा जिज्ञासा और सुधार की भावना विकसित करे। जवाहरलाल नेहरू ने भी इसे जीवन जीने का तरीका बताया थासवाल पूछना, सबूतों पर भरोसा करना, और नए तथ्यों के सामने पुरानी धारणाएं बदलने की क्षमता की जरूरत है।
सर्व प्रथम हमें शिक्षा प्रणाली में बदलाव सबसे महत्वपूर्ण रटने की बजाय पूछने और प्रयोग करने पर जोर दें। स्कूलों में “लर्निंग बाय डूइंग” (करके सीखना) अपनाएं प्रयोगशालाएं, प्रोजेक्ट, अवलोकन और गलतियों से सीखना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और अटल टिंकरिंग लैब्स जैसे प्रयासों को मजबूत करें। बच्चों को सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित करें, न कि सिर्फ जवाब याद करने के लिए,विज्ञान को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखें। विज्ञान मेले, ओलंपियाड, नेशनल चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस, और वैज्ञानिकों की जीवनी पढ़ाना मददगार है।
शिक्षक प्रशिक्षण में वैज्ञानिक पद्धति (परिकल्पना से प्रयोग का विश्लेषण सही निष्कर्ष निकालना सिखाएं। साथ ही परिवार और शुरुआती उम्र से शुरुआत से बच्चों की जिज्ञासा को दबाएं नहीं। “क्यों?” और “कैसे?” पूछने पर जवाब दें या साथ मिलकर खोजें।
हम सब घर पर सरल प्रयोग
(जैसे पानी का वाष्पीकरण, चुंबक, बीज उगाना) करें।
अंधविश्वास या जादुई सोच को तर्क और सबूत से चुनौती दें, बिना आस्था का अपमान किए. अंधविश्वास और छद्म-विज्ञान से लड़ाई
मीडिया, सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में वैज्ञानिक तथ्यों को बढ़ावा दें। अफवाहों और चमत्कारों का खंडन करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम,
विज्ञान क्लब और कार्यशालाएं आयोजित करें।
वैज्ञानिकों और संस्थानों (ISRO, CSIR आदि)
की उपलब्धियों को आम भाषा में पहुंचाएं।
मीडिया, संस्कृति और समाज की भूमिका प्रमुख है। टीवी, यूट्यूब, अखबारों में विज्ञान-आधारित कार्यक्रम, वृत्तचित्र और चर्चा बढ़ाएं। वैज्ञानिक उपलब्धियों (चंद्रयान, गगनयान, वैक्सीन आदि) को गर्व का विषय बनाकर युवाओं को प्रेरित करें।
साहित्य, फिल्म और कला में भी वैज्ञानिक सोच को जगह दें।
नीति और संस्थागत स्तर पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर GDP का अधिक प्रतिशत खर्च करें। विज्ञान संचार (Science Communication) को मजबूत करें—NCSTC जैसी संस्थाएं, विज्ञान दिवस, और अकादमियों की भूमिका बढ़ाएं। निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और विश्वविद्यालयों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करें। पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक जांच की कसौटी पर कसे बिना स्वीकार न करें।
कुछ व्यावहारिक सुझाव बच्चों को विज्ञान प्रदर्शनियां, संग्रहालय और ISRO/DRDO संबंधी सामग्री दिखाएं। खुद सवाल पूछने की आदत डालें किसी दावे को सिर्फ इसलिए न मानें क्योंकि वह पुराना या लोकप्रिय है। सबूत, तर्क और दोहराव (replication) पर भरोसा करें।
वैज्ञानिक सोच का मतलब धर्म या परंपरा को खारिज करना नहीं है। इसका मतलब है कि हम सम्मानपूर्वक सवाल पूछें, सबूत मांगें और सुधार के लिए तैयार रहें। यह व्यक्तिगत जीवन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक प्रगति का आधार है। शिक्षा और समाज दोनों स्तर पर निरंतर प्रयास से यह विकसित हो सकती है।







