मीडिया प्रभारी अल्मोडा़ः दिनेश चन्द्र भट्ट
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान लक्ष्मी भंडार
हुक्का क्लब में रामलीला आयोजित।
अल्मोड़ा: की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला में राम प्रतिज्ञा, सूर्पणखा नासिका छेदन, त्रिसरा वध, खर-दूषण वध तथा सीता हरण तक के प्रसंगों का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और भावनात्मक प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, मर्यादा और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।लीला की शुरुआत राम प्रतिज्ञा के प्रसंग से हुई, जिसमें भगवान श्रीराम के संकल्प, साहस और धर्म की रक्षा के प्रति उनकी दृढ़ता को दर्शाया गया। इसके पश्चात सूर्पणखा के प्रसंग का मंचन हुआ। सूर्पणखा नासिका छेदन के दृश्य ने रामलीला में रोमांच पैदा किया। इसके बाद त्रिसरा वध तथा खर-दूषण वध के प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। कलाकारों ने युद्ध के दृश्यों में अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से दर्शकों के बीच उत्साह का वातावरण बनाया।रामलीला का सबसे महत्वपूर्ण एवं भावनात्मक प्रसंग सीता हरण रहा। रावण द्वारा छलपूर्वक माता सीता का हरण किए जाने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से अहंकार, छल और अधर्म के परिणामों को दर्शाया गया। रामायण का यह प्रसंग आगे चलकर भगवान श्रीराम के संघर्ष, माता सीता की खोज तथा बुराई पर अच्छाई की विजय की पृष्ठभूमि तैयार करता है। मंचन के दौरान दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी के अल्मोड़ा जिलाध्यक्ष महेश नायल जी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रवि रौतेला, मनोज तिवारी, सुशीला वर्मा तथा होटल एसोसिएशन अल्मोड़ा के अध्यक् अरुण वर्मा जी ने प्रतिभाग किया। अतिथियों ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों के मंचन की सराहना करते हुए कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों को समाज तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी है।अतिथियों ने कहा कि श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब वर्षों से रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अल्मोड़ा की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, आदर्शों और मर्यादाओं को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी कलाकारों, पदाधिकारियों एवं सहयोगियों के प्रयासों की सराहना की।
संस्था के अध्यक्ष सचिव विनीत बिष्ट तथा रामलीला संयोजक एवं पूर्व सभासद राजेंद्र तिवारी जी के नेतृत्व में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। संस्था का प्रयास है कि वर्षों से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाया जाए और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए। रामलीला के आयोजन में संस्था के पदाधिकारियों, सदस्यों, कलाकारों और विभिन्न व्यवस्थाओं में जुटे सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
रामलीला को व्यवस्थित एवं आकर्षक बनाने में सहयोग करने वालों में त्रिभुवन गिरी, हर्षवर्धन वर्मा, मीनाक्षी साह अग्रवाल, मीनाक्षी जोशी, ललित मोहन साह, मनोज साह, भारत गोस्वामी, कंचन बिष्ट, विजय चौहान, कैलाश साह, अभय उप्रेती, मणिकरण गुप्ता, मानस वाणी, पारस, रोहित साह, चंदन आर्य, गौरव तिवारी, आकांक्षा, नीलम भट्ट, गीता तिवारी, हर्षिता तिवारी, अभय साह, विनोद गिरी एवं मिश्रा जी का योगदान रहा। सभी सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से रामलीला के मंचन और आयोजन से जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया जा रहा है।
हुक्का क्लब की रामलीला की विशेषता यह है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ-साथ अल्मोड़ा की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता की झलक भी देखने को मिलती है। रामलीला के माध्यम से समाज को सत्य, त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष इस परंपरा को बेहतर स्वरूप देने और दर्शकों को उत्कृष्ट मंचन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
दर्शकों की सहभागिता को और उत्साहपूर्ण बनाने के लिए प्रतिदिन की भाँति लीला के समापन पर लकी ड्रॉ का आयोजन भी किया गया, जिसमें दस भाग्यशाली दर्शकों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इस आयोजन ने दर्शकों के उत्साह को और बढ़ाया।

लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला अल्मोड़ा की ऐतिहासिक धरोहर और जनमानस की आस्था का प्रतीक है। संस्था से जुड़े सभी लोग इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं, ताकि भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति की यह अमूल्य विरासत इसी प्रकार जीवंत बनी रहे।






