प्रधानमंत्री के लिए ऐसी भाषा कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति का परिचायक: पाठक

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अतुल रमेश पाठक                                        (कार्यसमिति सदस्य भाजयुमो)                                 भिंड, मध्यप्रदेश

             (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)                                           (w) 6395080071

 

      प्रधानमंत्री के लिए ऐसी भाषा कांग्रेस                                की राजनीतिक संस्कृति का परिचायक: पाठक

 

खड़गे की टिप्पणी पर भाजयुमो नेता की तीखी प्रतिक्रिया,  बोले : प्रधानमंत्री पद की गरिमा का सम्मान करना चाहिए।

 

 

                  भिंड : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अतुल रमेश पाठक ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के लिए इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करना राजनीतिक मर्यादाओं के विपरीत है। लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा और संवैधानिक पदों का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है।

बताया जा रहा है कि भाषण के दौरान भीड़ में से किसी व्यक्ति ने कहा कि “मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं”, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे ने कथित तौर पर कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

                भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अतुल रमेश पाठक ने इस भाषा को प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं बताते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक नेतृत्व के प्रति असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग स्वस्थ राजनीतिक परंपराओं को कमजोर करता है। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणी और अभद्र भाषा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।

            उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के मुद्दों, विकास, रोजगार, महंगाई और जनकल्याण जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने वक्तव्यों से समाज में सकारात्मक संवाद को बढ़ावा दें और सार्वजनिक जीवन में संयम का परिचय दें।

      पाठक के अनुसार, विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। प्रधानमंत्री पद किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। इसलिए इस पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति असहमति व्यक्त करते समय भी शालीनता और राजनीतिक मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

        उन्होंने कहा कि देश की जनता राजनीतिक बयानबाजी से अधिक विकास, सुशासन और जनहित के कार्यों को महत्व देती है। नेताओं को चाहिए कि वे व्यक्तिगत कटाक्षों के बजाय तथ्यों, नीतियों और जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रखें।

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