अदिती कुशवाहा बैकुण्ठपुर (कोरिया) छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
मुस्कुराने की वजह बनो
चेहरे से ज्यादा
हृदय में मुस्कान रखो,
चाहे लोग कुछ भी कहें,
तुम खुद को मायूस मत रखो।
किसी की खुशी की वजह बनो,
शायद वही खुशी
लौटकर तुम्हारे पास आए।
कर्म चाहे जैसा भी हो,
एक दिन वह अपना रंग दिखाए।
क्यों न जिंदगी में
हम किसी की मुस्कान बनें,
चेहरे की खुशी से लेकर
किसी के हृदय की प्रसन्नता तक,
क्यों न किसी के जीवन में
खुशी का एक पल बनें।
रिश्ते तो निभाते हैं सभी,
पर क्यों न हम
हर रिश्ते से आगे बढ़कर
इंसानियत निभाएँ?
रिश्ता हमारा-तुम्हारा हो
या न हो,
पर इंसानियत तो है ना!
मैं तुम्हें देखकर मुस्कुराऊँ,
तुम मुझे देखकर मुस्कुरा देना,
क्या पता हमारी यही मुस्कान
किसी के जीने की वजह बन जाए।
फिर हर सुबह
एक नई उम्मीद लेकर आए,
और जिंदगी
हँसते-मुस्कुराते
अपनी उड़ान भर जाए।
अगर सूरज से नाराज़ हो,
तो चाँद जैसा बन जाओ,
मन में बहुत गर्मी हो
तो थोड़ा शीतल हो जाओ।
चाय की प्याली अच्छी लग रही है,
तो एक पल ठहरकर मुस्कुराओ।
जिंदगी में दुख बहुत है,
तो उसे दूर करने की कोशिश भी कर जाओ।
तू मेरा साथी है,
मैं तेरा साथी हूँ,
क्यों न चलें
एक-दूसरे का हाथ थामे बिना भी,
एक-दूसरे का हौसला बनकर?
चलो,
हँसते-मुस्कुराते
जिंदगी की राह पर आगे बढ़ें,
और मिलकर
जिंदगी की उड़ान भरें।






