संवाददाता आगर मालवा : गोवर्धन कुम्भकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
वर्षों से संचालित ईंट-भट्ठों पर प्रशासन की कार्रवाई, कुम्हार समाज को अतिक्रमण बताकर किया बेदखल।
एसटीपी निर्माण के लिए नगर परिषद को आवंटित 0.751 हेक्टेयर भूमि पर चला प्रशासन का बुलडोजर, न्यायालय में मामला विचाराधीन होने का समाज ने किया दावा।
बिना पूर्व सूचना कार्रवाई से नाराज समाज, कहा—पारंपरिक रोजगार पर गहराया संकट।
कानड़ः पचलाना मार्ग स्थित सर्वे क्रमांक 1882 की भूमि पर शनिवार को जिला कलेक्टर के आदेश पर राजस्व विभाग, नगर परिषद और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर भूमि का सीमांकन किया और जेसीबी मशीनों के माध्यम से भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर समतलीकरण की कार्रवाई शुरू की। उक्त 0.751 हेक्टेयर भूमि नगर परिषद को एसटीपी निर्माण के लिए आवंटित की गई है।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों, नगर परिषद के अमले और पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों से भूमि को खाली कराया गया। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित भूमि पर अतिक्रमण किया गया था, जिसे हटाने के लिए कलेक्टर के आदेशानुसार कार्रवाई की गई।
पट्टे की भूमि बताकर समाज ने जताई आपत्ति
वहीं कुम्हार (प्रजापति) समाज के लोगों का कहना है कि वे वर्षों से उक्त भूमि पर ईंट-भट्ठों का संचालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी पट्टे वाली भूमि को अतिक्रमण बताकर उन्हें बेदखल कर दिया। समाज का कहना है कि भूमि को लेकर विवाद पहले से न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में त्योहार के समय इस प्रकार की कार्रवाई करना उचित नहीं है।
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अमला अपनी प्रक्रिया पूरी करता रहा, जबकि प्रभावित परिवार बेबस होकर अपनी आंखों के सामने वर्षों से संचालित रोजगार स्थल को खाली होते देखते रहे।
न्यायालय में विचाराधीन है सीमांकन का मामला
प्रजापति समाज का कहना है कि सर्वे क्रमांक 1882 की भूमि के सीमांकन को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। इस संबंध में आगर न्यायालय में न्यायाधीश मोनिका यादव के समक्ष प्रकरण क्रमांक RCSA/124/2026 के तहत याचिका दायर की गई है। इसके अलावा विभाग द्वारा पूर्व में की गई सीमांकन कार्रवाई के विरुद्ध उच्च न्यायालय में भी रिट याचिका दायर किए जाने की बात समाज के लोगों ने कही है।
समाज के लोगों का आरोप है कि जब भूमि के सीमांकन का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो अंतिम निर्णय आने से पहले इस प्रकार की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक कार्रवाई से पहले लिखित आवेदन देकर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद राजस्व विभाग और नगर परिषद के अमले ने कार्रवाई करते हुए उन्हें बेदखल कर दिया।
रोजगार पर गहराया संकट
समाज के लोगों का कहना है कि कुम्हार समाज के कई परिवार वर्षों से पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने और ईंट-भट्ठों के कारोबार से अपनी आजीविका चला रहे हैं। अचानक हुई कार्रवाई से उनके सामने रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
समाज ने स्पष्ट किया कि वह विकास कार्यों अथवा वाटर फिल्टर प्लांट के विरोध में नहीं है, लेकिन पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था किए बिना तथा न्यायालय के फैसले का इंतजार किए बगैर की गई कार्रवाई से परिवारों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी
देवकरण कुम्भकार, महेश कुम्भकार, मोहनलाल कुम्भकार एवं राजेश कुम्भकार ने कहा कि सीमांकन को लेकर न्यायालय में याचिका दायर है। इसके बावजूद राजस्व विभाग और नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। समाज की ओर से लिखित आवेदन देने के बाद भी उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से समाज के परंपरागत रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। समाज के लोगों ने बताया कि वे प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ कानूनी और सामाजिक स्तर पर अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे। उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि भूमि विवाद का अंतिम निर्णय न्यायालय के माध्यम से हो।
कार्रवाई के दौरान अधिकारी रहे मौजूद


कार्रवाई के दौरान राजस्व विभाग के आरआई राहुल जैन, कस्बा पटवारी महेश मालवीय, शिवपाल सिंह सोनगरा, मनोहर तालविया सहित अन्य पटवारी मौजूद रहे। वहीं नगर परिषद के सीएमओ चौहान भी नगर परिषद के अमले के साथ मौके पर उपस्थित रहे।







