बीएल भूरा चन्द्र शेखर आजाद नगर भाबरा, मध्यप्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
मैं आजाद था, आजाद हूं, और आजाद रहूंगा
मैं आजाद था, आजाद हूं, और आजाद रहूंगा,
ये नारा नहीं, ये मेरी सांस है,
अंग्रेज पूछते रहे – तेरा नाम क्या है?
मैंने कहा – मेरा नाम आजाद है।
बाप का नाम – स्वतंत्रता,
घर का पता – जेलखाना,
भाबरा की माटी ने जन्मा,
और इलाहाबाद ने अमर बनाया।
कोड़े पड़े थे पीठ पर,
पर होंठों पर मुस्कान थी,
पंद्रह साल की उम्र में ही,
हिंदुस्तान की पहचान थी।
मैं आजाद था – जब गुलाम था देश,
मैं आजाद हूं – जब लड़ रहा है देश,
मैं आजाद रहूंगा – जब तक बहेगी,
गंगा, यमुना, नर्मदा का नीर अशेष।
माउजर मेरी गीता बनी,
कारतूस मेरे श्लोक,
एक-एक गोली पर लिखा था,
भारत माता की जय का आलोक।
अल्फ्रेड पार्क आज भी रोता है,
उस दिन की गाथा सुनाता है,
एक अकेला लड़ गया पूरी फौज से,
ये इतिहास दोहराता है।
मुझे पकड़ना है तो सुनो अंग्रेजो,
आसमान को पकड़ो, हवा को बांधो,
आजाद को कैद कौन करेगा,
पहले मौत को ही साधो।
इसलिए आज भी कहता हूँ,
हर युवा के दिल से कहता हूँ,
मैं आजाद था, आजाद हूं, और आजाद रहूंगा,
हर सांस में, हर धड़कन में रहता हूँ।






