बीएल भूरा चन्द्र शेखर आजाद नगर भाबरा, मध्यप्रदेश
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
मध्यस्थता
समाज की धड़कन जब रुक-रुक चलती है,
तब-तब विवादों की आँधी चलती है।
आँगन बँट जाते, दिल बँट जाते हैं,
भाई-भाई के दुश्मन बन जाते हैं।
ऐसे में एक दीपक जलता है,
मध्यस्थ बनकर कोई चलता है।
वो कहता – सुनो, जरा ठहर जाओ,
क्रोध को छोड़ो, प्रेम से बैठ जाओ।
तुम भी सही हो, तुम भी सही हो,
पर थोड़ा-थोड़ा सब्र तो करो।
बात छोटी है, इसे बड़ा न बनाओ,
बैठकर आपस में इसे सुलझाओ।
पंचों की बात में परमेश्वर होता है,
मध्यस्थ का वचन कभी न खोता है।
जो झुक जाता है, वो छोटा नहीं होता,
जो माफ करता है, वो कभी नहीं रोता।
समाज वही जो जोड़ना जाने,
टूटे हुए दिलों को मोड़ना जाने।
मध्यस्थता से घर बचते हैं,
मध्यस्थता से रिश्ते सजते हैं।
आओ हम संकल्प उठाएँ,
हर विवाद को संवाद से सुलझाएँ।






