प्रभारी सम्पादकः दिनेश शास्त्री
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प्रो. (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के काव्य संग्रह ‘कर्म की पगडंडियां’ पर हुआ राष्ट्रीय व्याख्यान।
देहरादूनः देश के लब्ध-प्रतिष्ठ व्यक्तित्व, साहित्य अकादमी के बाल साहित्य पुरस्कार से सम्मानित, प्रख्यात हिंदी साहित्यकार, प्रोफेसर (डॉ.) दिनेश चमोला ‘शैलेश’ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सत्ताईसवाँ 27वाँ राष्ट्रीय ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया । दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, चेन्नई द्वारा आयोजित यह व्याख्यान प्रोफेसर चमोला के सद्य-प्रकाशित हिंदी कविता संग्रह ‘कर्म की पगडंडियां’ पर केंद्रित रहा ।
समारोह के अध्यक्ष, अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल (मध्य प्रदेश) के कुलपति प्रो.देव आनंद हिंडोलिया रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के प्रोफेसर (डॉ.) कामराज सिंधु रहे, जबकि आमंत्रित विद्वान के रूप में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के हिंदी विभाग के अध्यक्ष, डॉ. भवानी सिंह रहे।
अध्यक्ष, प्रो. हिंडोलिया में विवेचित काव्य संग्रह पर बोलते हुए कहा कि कोई भी रचनाकार अपने रचनाओं से जाना जाता है । मैं इनको और इनके लेखन से लंबे समय से परिचित हूं । विभिन्न विधाओं में 90 से अधिक पुस्तक लिखने वाले इस रचनाकार का व्यक्तित्व देश व्यापी है । इस काव्य संग्रह का शीर्षक ही स्वयं में अत्यंत संवेदनशील एवं वैचारिक ऊर्जा से परिपूर्ण है । कवि ने अपने गहन चिंतन, महीन दृष्टि से प्रकृति, जीवन एवं समकालीन सत्य को जिस कुशलता से बुना है, वह अत्यंत मर्मस्पर्शी है । कवि की विचारोत्तेजक ये 62 कविताएं उनकी गहन चिंतन सामर्थ्य, अद्भुत काव्य-कौशल एवं समकालीन सत्य एवं जीवन-संघर्ष को सामने रखने की में बखूबी सार्थक सिद्ध हुआ है । जो अपने युग की धड़कन, सत्य,संघर्ष, जीवन-संघर्ष एवं सत्य को लिपिबद्ध कर देता है, वही बड़ा रचनाकार है…. जो इस संग्रह की प्रत्येक कविता में चिंतन में विचार के धरातल पर अक्षरश: सिद्ध होती है। आज के समाज और आज की पीढ़ी को ये कविताएं अवश्य पढ़नी चाहिए। मैं प्रोफेसर चमोला की इन अद्भुत कविताओं से अत्यंत प्रभावित हूं। कवि का यह अद्भुत चिंतन ही उसे दूसरी सदी तक ले जाएगा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़ के प्रोफेसर कामराज सिंधु ने कहा कि विभिन्न विधाओं में प्रोफेसर चमोला का उत्प्रेरक व आदर्श लेखन युगों तक भी पाठकों एवं मौलिक चिंतन की राह पर चलने वाली विद्यार्थियों अथवा शोधार्थियों के लिए प्रेरणा अद्भुत प्रेरणा का कार्य करेगा। उन्होंने मूल्य, स्वाभिमान व मौलिकता के आदर्श को न केवल अपने साहित्य में, अपितु जीवन में भी यथाशक्ति स्थापित किया है जो परोक्षतः उनके लेखन का प्राण तत्त्व है।
प्रो.चमोला ने विभिन्न विधाओं में अपनी लिखने चलाई है और केवल उनका स्पर्श मात्र नहीं किया अभी तो उन्होंने अपनी विशेषज्ञता भी दर्ज की है जो आपकी राष्ट्रीय ख्याति का पर्याय है । आपके इस संग्रह की रचनाएं अत्यंत विचारोत्तेजक के साथ साथ महत्वपूर्ण एवं अपने समय की विद्रूपताओं, संघर्षों एवं जीवन मूल्यों को उद्घाटित करती हुई पाठक के मन में रच, बस जाने की क्षमता रखने वाली कविताएं हैं ।
आमंत्रित विद्वान के रूप में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के हिंदी विभाग के अध्यक्ष, डॉ. भवानी सिंह ने प्रो.चमोला के विपुल साहित्य की सराहना की, अपितु वहीं इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियों की आयोजन की श्रृंखला को भी गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मैं इनके विपुल साहित्य से कई दशकों से परिचित हूं और शीघ्र ही मैं उनके साहित्य पर अपने विश्विद्यालय में गंभीर शोधकार्य कराऊंगा ताकि आज की जन जी उनके साहित्य और मूल्यादर्श से परिचित होकर कुछ ज्ञानार्जन कर सके।
इस संग्रह की अधिकांश कविताएं अपनी वैचारिक गहनता, आदर्श के उत्कर्ष, दर्शनिकता एवं संप्रेषणीयता के कारण अत्यंत मर्मस्पर्शी बन पड़ी हैं।
व्याख्यान के संयोजक के रूप में सभा के कुलसचिव, प्रो. मंजुनाथ एन अंबिग कहा कि यह मेरा सौभाग्य है प्रोफेसर चमोला के इतने महत्वपूर्ण साहित्य के कारण मुझे देश-दुनिया की बड़े-बड़े विद्वानों के सान्निध्य का सुख मिलता है और यह श्रृंखला सौवें व्याख्यान तक अबाध गति से चलती रहेगी। कार्यक्रम का संचालन भावना गौड़ तथा लेखक परिचय डॉ. रीना संधू ने किया। इसमें देश के अनेक विद्वानों, शोधार्थियों एवं अध्यापकों में प्रतिभाग किया।








