राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत जेल अधीक्षक) बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
कुछ यादें, कुछ लम्हें
खिड़की पर टाँग रखे हैं,
पुरानी हवाओं में लिपटे
दिल के आँगन में बसे हुए।
पुराने प्रेम-पत्र, पीले से,
शायरों की डायरियों में
सालों से संभाले रखे हैं।
वो चाँदनी रातें, वो बरसातें,
कागज़ पर बनी दिल की आकृतियाँ,
हर साँस में बसी हैं, हर धड़कन में
अधूरी कहानियाँ संजो रखी हैं।
तुम्हारी हँसी की वो गूँजें
अभी भी कानों में बजती हैं, थमी नहीं,
दूर कहीं खोई थीं, फिर लौट आई हैं,
यादों की डोर से बँधी हुई।
बस यही असफल प्रयास है—
अब तो ये लम्हें भी कहते हैं,
“भूल न जाना, जी न छोड़ना हमें।”
खिड़की से झाँको, मुस्कुरा दो,
ये पल फिर से जी लो।
खिड़की पर लहराते पर्दे
कभी भी गाने लगेंगे…






