ऊखीमठः पर्यटक गांव सारी से भगवती नन्दा भावुक क्षणों, महिलाओं के पौराणिक जागरो तथा सैकड़ों भक्तों की जयकारों के साथ विदा होकर अपने तपस्थली मक्कूमठ में पहुंच कर जगत कल्याण के लिए तपस्यारत हो गयी है!

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ब्यूरो रुद्रप्रयागः लक्ष्मण सिंह नेगी।

ऊखीमठः पर्यटक गांव सारी से भगवती नन्दा भावुक क्षणों , महिलाओं के पौराणिक जागरो तथा सैकड़ों भक्तों की जयकारों के साथ विदा होकर अपने तपस्थली मक्कूमठ में पहुंच कर जगत कल्याण के लिए तपस्यारत हो गयी है! भगवती नन्दा के आगमन से तुंगनाथ घाटी के विभिन्न गांवों का वातावरण कई दिनों तक भक्तिमय बना रहा तथा ग्रामीण भगवती नन्दा की असीम भक्ति में डूबे रहें! भगवती नन्दा के आगमन पर ग्रामीणों द्वारा अनेक प्रकार के धार्मिक आयोजन किये गए जिसमें सभी गांवों में बगडवाल नृत्य मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहा! गुरूवार को सारी गांव से भगवती नन्दा के विदा होते समय महिलाओं की आंखें छलक उठी तथा ग्रामीणों ने भगवती नन्दा को विदा होते समय कई स्थानीय व्यंजन भेंट कर मनौती मांगी! भगवती नन्दा की विदा होते समय महिलाये दूर खेत – खलिहानों तक भगवती नन्दा की राह निहार कर अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना करती रही ! जानकारी देते हुए ईको पर्यटन विकास समिति अध्यक्ष मनोज नेगी ने बताया कि भगवती नन्दा के प्रति वर्ष शारदीय नवरात्रों के अष्टमी से क्षेत्र भ्रमण की परम्परा युगों पूर्व की है तथा भगवती नन्दा प्रति वर्ष काण्डा, हूण्डू , उषाडा़, दैडा़, व सारी गाँवों का भ्रमण कर ग्रामीणों को आशीर्वाद देती है तथा भगवती नन्दा के आगमन से ग्रामीणों में भारी उत्साह बना रहता है। पूर्व सूचना अधिकारी गजपाल भटट् ने बताया कि भगवती नन्दा के आगमन पर विभिन्न गांवों के ग्रामीणों द्वारा अनेक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है तथा पौराणिक जागरो के माध्यम से भगवती नन्दा की महिमा का गुणगान किया जाता है! सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल बजवाल ने बताया कि भगवती नन्दा के आगमन से सभी गांवों का वातावरण भक्तिमय बना रहता है तथा ग्रामीणों में भगवती नन्दा के प्रति अगाध श्रद्धा बनी रहती है! देवरिया ताल पर्यटन समिति अध्यक्ष दिलवर सिंह नेगी ने बताया कि भगवती नन्दा के विदाई का समय बड़ा भावुक होता है! पूर्व प्रधान प्रदीप बजवाल ने बताया कि भगवती नन्दा के आगमन से ग्रामीणों में प्यार, प्रेम व सौहार्द बना रहता है! प्रधान मक्कू विजयपाल नेगी ने बताया कि भगवती नन्दा के भ्रमण के दौरान ग्रामीण अपने श्रद्धा के अनुसार अनेक प्रकार के व्यंजन अर्पित कर मनौती मांगते है तथा भगवती नन्दा की विदाई का समय बड़ा भावुक होता है।

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