सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री, लेखिका एवं शिक्षिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा/राजिम
(रायपुर), छ.ग.
(नया अध्याय, देहरादून)
“वर्तमान में जीयो !”
(कविता)
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जिंदगी एक सफर है, बस चलते रहिए,
लक्ष्य को मन में धरकर आगे बढ़ते रहिए।
उदासी का न यूँ ओढ़िए आवरण,
सफलता हेतु हर पल कोशिश करते रहिए।
अतीत की बाहों में यूं न डूबे रहिए,
वर्तमान को जी भरकर जी लीजिए।
चिंता-फिक्र में वक़्त न बर्बाद कीजिए,
हर कर्म अपना पूरे मन से करते रहिए।
गम की गठरी बांधकर न बैठे रहिए,
खुशियों को खुद ही ढूंढ निकालिए।
थक-हारकर कारवां में न रुकिए,
मेहनत से अपनी किस्मत बदलिए।
प्यार हरदम एक-दूजे को बाँटते रहिए,
नफरतों को दिल में न कभी पालिए।
हिम्मत की लौ जलाकर काम कीजिए,
आलस को पास आने न दीजिए।
सोचका असीम विस्तार कीजिए,
फिजूल की बातें मन में न भरिए।
हँसते रहिए और सबको हँसाते रहिए,
जो सच है उसे बेबाक कहते रहिए।
झूठ, फरेब और स्वार्थ से दूर ही रहिए,
जिन्दगी के हर पल से कुछ सीखते-जीते रहिए।
संकुचित दायरों से बाहर निकल आइए,
खुद में छुपे हर हुनर को निखारिए।
मक्कार, कपटी लोगों का आज समाज,
निस्वार्थ लोग ही रिश्ते सहेजकर रखते।
बहकावे में किसी के न आना,
कर्मपथ पर चलते जाना,
फर्ज इंसानियत का सदा निभाते रहिए।







