डॉ0 हरि नाथ मिश्र
पूर्व विभागाध्यक्ष-अँगरेजी,
का0 सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
अयोध्या, (उ0प्र0)
(नया अध्याय, देहरादून)
लोकहित- संदेश
प्रकृति से कर ले नेह रे भाई!!
वेद,पुराण,ज्ञान,निगमागम यहि मा सबै समाई।
विधि-हरि-हर-सुर-सार,गिरा-गुरु-गरिमा में है नहाई।।
प्रकृति से कर ले…।।
मंदिर,मस्ज़िद,गिरजा लखि सच सबने अलख जगाई।
क्षिति,जल,पावक,पवन,अवनि यह जानो यही सचाई।।
प्रकृति से कर ले….।।
प्राण-रक्षिका यही प्रकृति ही करती सदा भलाई।
धान्य-संपदा-दात्री इसमें सद्गुण पड़े लखाई।।
प्रकृति से कर ले……।।
जननी सम जग-पोषण करती,प्रकृति-गोद सुखदाई।
छेड़-छाड़ मत करना इससे, होगी जगत-हँसाई।।
प्रकृति से कर ले………….।।
प्रकृति ईश है,ईश प्रकृति है यहि मा सकल खुदाई।
प्रकृति छाँड़ि जो अरु कछु पूजा,बूड़े सकल कमाई।।
प्रकृति से कर ले नेह रे भाई।।







