सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री-लेखिका-शिक्षिका
अध्यक्ष – दुर्गा शक्ति समिति
गोबरा नवापारा-राजिम, रायपुर, (छ.ग.)
(नया अध्याय, देहरादून)
“नजरों की जुबान!”
_(कविता)_
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नजर पढ़ना हुनर है अगर,
खोल दे अंतर्मन का हर दर।
भावों का समंदर अथाह,
हर पल जिंदगी इम्तिहान।
रूह छू ले, अश्क बन बहे,
प्यार मिले तो छलक पड़े।
वीरान राह पर सहम जाए,
खामोश रहकर सब कह जाए।
खुशी में राज, गम में ढाल,
नफरत को कर दे दिल से बाहर।
उम्मीद थामे, वादे निभाए,
पलकों में तूफान छुपाए।
नजर में सिमटा ये जहान,
सोच बदलो तो गुलिस्तान।
जज्बात का कोई मोल नहीं,
ये किसी के गुलाम नहीं।
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