चौपाइयाँ (आशा)

Spread the love

 

डॉ0 हरि नाथ मिश्र

पूर्व विभागाध्यक्ष-अँगरेजी,

का0 सु0 साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय,

अयोध्या, (उ0प्र0)

 

               (नया अध्याय, देहरादून)

 

 

 

चौपाइयाँ (आशा)

 

भरी रहे यदि मन में आशा।

तो रहती है दूर निराशा ।।

 

शुचि चिंतन ही हितकर होता।

भ्रष्ट सोच से नर सुख खोता।।

 

जिसकी सोच रहे हितकारी।

आशा का बस वही पुजारी।।

 

यदि आशा का दीपक जलता।

कभी न मन में विभ्रम पलता।।

 

आशा एक मनोरथ-सरिता।

उर्मि-उमंग कष्ट सब हरता।।

 

रखे जो आशा-दीप जलाए।

तम-भ्रम-जाल न उसे फँसाए।।

 

वेद-पुराण-ग्रंथ सब कहते।

आशा भरे हृदय प्रभु बसते।।

 

भरी रहे जब आशा मन में।

रहता सुखमय जीवन जग में।।

              

  • Related Posts

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने संजीव कांकर के प्रथम आगमन पर किया जोरदार स्वागत।

    Spread the love

    Spread the love      ब्यूरो  भिंड : नया अध्याय     भाजपा कार्यकर्ताओं ने संजीव कांकर के प्रथम आगमन पर किया जोरदार स्वागत।            भिंड…

    शाश्वत नाम तुम्हारा

    Spread the love

    Spread the love  विरेन्द्र जैन माहिर  नागपुर महाराष्ट्र                (नया अध्याय, देहरादून)     शाश्वत नाम तुम्हारा   मुझ अनगढ़ माटी को भी इंसानी…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    खोजी पत्रकारिता के स्वर्णिम काल की अनूठी मिसालः1980

    • By User
    • May 10, 2026
    • 15 views
    खोजी पत्रकारिता के स्वर्णिम काल की अनूठी मिसालः1980

    भाजपा कार्यकर्ताओं ने संजीव कांकर के प्रथम आगमन पर किया जोरदार स्वागत।

    • By User
    • May 9, 2026
    • 4 views
    भाजपा कार्यकर्ताओं ने संजीव कांकर के प्रथम आगमन पर किया जोरदार स्वागत।

    शाश्वत नाम तुम्हारा

    • By User
    • May 9, 2026
    • 18 views
    शाश्वत नाम तुम्हारा

    माँ की ममता

    • By User
    • May 9, 2026
    • 6 views
    माँ की ममता

    अपराध नियंत्रण की दिशा में सशक्त पहल: कन्नौज में अपराध गोष्ठी का किया गया आयोजन।

    • By User
    • May 9, 2026
    • 19 views
    अपराध नियंत्रण की दिशा में सशक्त पहल: कन्नौज में अपराध गोष्ठी का किया गया आयोजन।

    ”जागो व बढ़ो!” (कविता)

    • By User
    • May 9, 2026
    • 14 views
    ”जागो व बढ़ो!” (कविता)