सुश्री सरोज कंसारी
लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका
अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,
नवापारा-राजिम, (रायपुर, छ.ग.)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“हम हिन्दुस्तानी, इंसान बने रहें”
(कविता)
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हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
को भुलाकर ऐसा कोई काम करें।
हम आपस की तकरार छोड़कर,
पहले इंसान बने रहें हम।
दिलों की नफ़रत को मिटाकर,
प्रेम का संदेशा भरें हम।
आपस में मिलकर ऐसा काम करें,
पहले इंसान बने रहें हम।
छोड़कर ईर्ष्या, द्वेष की भावना,
सच्चाई की राह चलें हम।
आपस की तकरार छोड़कर,
पहले इंसान बने रहें हम।
भौतिकता की अंधी दौड़ के पीछे,
दौलत की न प्यास करें हम।
स्वदेशी को अपनाकर आओ,
पहले हिन्दुस्तानी बने रहें हम।
अफ़वाहों की बातों को छोड़कर,
सच्चाई से दामन जोड़ें।
नेकी की राहों पर चलकर,
नेकी का पैगाम बने रहें हम।
अपनी संस्कृति, सभ्यता से,
जोड़ें नाता, ऐसा संस्कार बुनें हम।






