गलत रवैया — एक प्रकार की विकलांगता है !

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सुश्री सरोज कंसारी

लेखिका, कवयित्री व अध्यापिका

अध्यक्ष: दुर्गा शक्ति समिति,

नवापारा-राजिम, (रायपुर, छ.ग.)

 

 

                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

लेख

 

       गलत रवैया — एक प्रकार की विकलांगता है !

– सुश्री सरोज कंसारी 

 

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“शब्दों में जिसके कांटे हों,

वह पुष्प नहीं बिखेर सकता !”

 

संसार के प्रवाह को अस्वीकार करना ही दुख का कारण है। हर मनुष्य, जिसने इस धरा पर जन्म लिया है, विचारों की गहराई लिए हुए है। जीवन को सहज, सरल, सुंदर, आकर्षक, सौम्य, मधुर और प्रेमपूर्ण बनाने की सारी क्षमताएँ उसमें उपलब्ध हैं। कोई किसी से कम या अधिक नहीं — ईश्वर की रचना सर्वश्रेष्ठ है। जरूरत बस इतनी है कि उन क्षमताओं को व्यवहार में लाया जाए, परिस्थिति के अनुकूल हुआ जाए और शांत मन से विचार किया जाए।

 

संसार एक महासंगम है — व्यावहारिक और अव्यावहारिक कार्यों तथा विचारों का। इसमें कल्पना, एहसास, ख्वाहिश, खुशी, गम, दर्द, प्यार, नफरत, दया-धर्म, करुणा, साहस, धैर्य, मंजिल, रास्ते और भी बहुत कुछ है, जो बेहतर जीवन के लिए उपयोगी है। हम पर निर्भर है कि हम क्या चुनते हैं।

 

जो मनुष्य जन्म की अहमियत समझते हैं, वे अपने लिए सद्व्यवहार रूपी अनमोल मोती चुनते हैं। जो भी उनसे जुड़े हैं, उन्हें वे उपहार के रूप में बाँटते हैं और बदले में स्नेह व अपनापन ही पाते हैं। ऐसे लोग सहयोग देते हैं, किसी के दर्द में भागीदार होते हैं। वे जानते हैं कि सब कुछ नाशवान है, एक दिन मिट जाना है — तो किसी से गलत बर्ताव करने से क्या फायदा? इसलिए वे सदैव सदाचार अपनाते हैं।

 

हर किसी को यह ज्ञान होना चाहिए कि उसके भीतर समाहित शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा है। पर जरूरी नहीं कि सभी को यह ज्ञात हो। अज्ञानवश कुछ लोग मान लेते हैं कि उनका जीवन सुख-समृद्धि, पद-प्रतिष्ठा और धन-संपदा अर्जन के लिए ही हुआ है। वे अपना बहुमूल्य समय केवल भौतिक सामग्री जुटाने में बिता देते हैं। जिनके आचरण में बनावटीपन होता है, वे भोग-विलासपूर्ण जीवन में घमंड में चूर हो जाते हैं। उन्हें अपने स्वार्थ के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता। जब तक उनके पास सुख-सुविधा होती है, वे अपने साथ जुड़े लोगों को अहमियत नहीं देते, जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते। बहस, बैर, झगड़े करना, अप्रिय वचन कहना, सम्मान न करना — यह उनकी आदत बन जाती है। अपने गलत आचरण से वे सदा लोगों का दिल दुखाते हैं।

 

अपने हृदय रूपी विशाल भंडार से क्या लेना है, यह हमें मालूम होना चाहिए। हमारे पास सुंदर विचार हैं, सब कुछ है। जरूरत है तो बस एक सार्थक पहल की — हिम्मत और धैर्य के साथ उसे ढूँढ निकालने की। हम सब एक ही रंगमंच के कलाकार हैं। सबको अलग-अलग किरदार निभाना पड़ता है। जो अपने सुंदर अभिनय से लोगों को आकर्षित कर ले, वही अपनी अलग पहचान बना सकता है।

 

जब हम इस दुनिया में आते हैं, खाली हाथ आते हैं। जो मिलता है, यहीं से अपने प्रयास, लगन और मेहनत से अर्जित करते हैं। अपने सुख-दुख के हम बहुत हद तक स्वयं भागीदार हैं। जब सब कुछ ईश्वर का दिया हुआ है, तो खोने और पाने का भय क्यों पालें? सब समर्पित कर जाना है इस जहान को — तो वहम न पालें। जो हो रहा है, उसे स्वीकार करें और लिप्त रहें अपने कार्यों में, लोगों की सेवा और सद्भाव में। संसार के प्रवाह में हम सभी शामिल हैं और उसे स्वीकार करना हमारा कर्तव्य है। स्वभाव मनुष्य का सबसे सुंदर गहना है।

 

संस्कारों से सुसज्जित मनुष्य ही सृष्टि के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जीवन के विविध रूपों का सामना करते हुए मन में प्रश्न उठते हैं, समस्याएँ आती हैं, द्वंद्व चलता है। इस बीच जो अपना संयम नहीं खोते और सहजता से सब पार कर जाते हैं, वही अपनी असली मंजिल प्राप्त करते हैं — जहाँ उन्हें सुकून मिलता है।

 

लेकिन कुछ लोगों की प्रवृत्ति ही होती है लोगों से गलत रवैया अपनाने की। जहाँ आपसी प्रेम से सब काम हो सकते हैं, वहाँ भी वे अव्यावहारिक कार्य करते हैं — कटु वचन कहते हैं, किसी की बात को अहमियत नहीं देते। गलत रवैया एक प्रकार की विकलांगता है। जब आप हर बात पर हठ करते हैं, बिना वजह जलन भाव प्रदर्शित करते हैं, तो आपकी छवि भी वैसी ही बनती है।

 

एक शारीरिक रूप से विकलांग मनुष्य भी अपनी हिम्मत और अच्छे व्यवहार से, अपनी क्षमता से अधिक कार्य कर, अपने हुनर से लोगों के दिलों में स्थान बना लेता है और मंजिल तक पहुँच जाता है। लेकिन गलत रवैया अपनाने वाला मनुष्य किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाता। एक तरह से वह स्वस्थ होकर भी विकलांग के समान ही होता है, क्योंकि उसके आचरण में मानवता ही नहीं है। जिसके हृदय में केवल नफरत हो, जो किसी की खुशी देखकर दुखी हो — वह निश्चित रूप से मृत के समान है।

 

जो हर समय अपने ही स्वार्थ में लिप्त होकर दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करे, वह इंसान की श्रेणी में आता ही नहीं। पद और प्रतिष्ठा तो एक समय के बाद समाप्त हो जाएँगे, लेकिन आपका व्यवहार लोग कभी नहीं भूलते। दुख में दिया गया सहयोग, सांत्वना के शब्द, मीठे वचन, अपनापन — यही असली धन है, जो आपको दुगुना रूप में मिलता ही है।

 

लेकिन गलत रवैया अपनाने वाले व्यक्ति के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं होता। एक बार लोगों के मन से उतरने के बाद पुनः स्थान बनाना बहुत कठिन होता है। इसलिए जीवन का कोई भी मोड़ हो, समभाव से रहें। जब तक जीवित हैं, अपना व्यवहार सौम्य रखें। बाह्य सुंदरता क्षणिक सुख देती है, लेकिन आंतरिक सुंदरता और सद्व्यवहार से हम सदियों तक लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं। अच्छे कार्य से ही जीवन सफल होता है।…इसलिए अपना व्यवहार हमेशा अच्छा रखें — क्योंकि यही सच है। गलत रवैया एक प्रकार की विकलांगता है।

 

 

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