सुनील कुमार वर्मा
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
जश्न
दूसरों के आंसुओं से खुद की बगिया
सींचकर महकाता नहीं मैं।
खुद के सपनों को पूरा करने दूसरों की
हकीकतें चुराता नहीं मैं।
सफर कठिन से कठिनतम हो गर मेरा
फिर भी दूसरों की राहों में
कांटें बिछाता नहीं मैं।
चांद, सितारे, सूरज सभी के हैं।
ग्रहण बनकर दूसरों की किस्मतों
पर छाता नहीं मैं।
दूसरों के दुखों की दास्तां पर खुद की
कामयाबी का जश्न कभी मनाता नहीं मैं।






