प्यास                    (लघु कथा)

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 रंजन गायकवाड 

(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) 

बिलासपुर, छत्तीसगढ़

 

               (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

 

                    प्यास

                   (लघु कथा)

 

“जरूरी नहीं कि हर प्यासे की प्यास बादल बुझा दे, कभी-कभी आँखों का पानी भी काम आता है।” कभी कभी अकेलापन में हर बार मदद समय पर नहीं मिलती। अक्सर आंसू: दुःख में खुद के आंसू ही सांत्वना देते हैं।

 

एक छोटा सा गाँव था, जहाँ पिछले तीन सालों से बूंद भर बारिश नहीं हुई थी। खेत सूखकर पत्थर हो चुके थे और कुएँ पाताल छू रहे थे। गाँव का युवा किसान, माधव, हर रोज़ आसमान में बादलों की राह तकता, एक दिन आसमान में काले-घने बादल घिर आए। पूरा गाँव खुशी से नाच उठा। माधव की आँखों में भी उम्मीद की चमक आ गई लेकिन, कुछ ही मिनटों में तेज हवा चली और वे बादल बिना बरसे ही गाँव को पार कर गए। उम्मीद टूटने पर माधव वहीं जमीन पर बैठ गया। उसे लगा कि अब सब कुछ ख़त्म हो चुका है।

उसी गाँव के कोने में एक बूढ़े और समझदार व्यक्ति रहते थे, जिन्हें सब ‘काका’ कहते थे। काका ने माधव को रोते हुए देखा। वे उसके पास गए, उसके कंधे पर हाथ रखा और बोले, “माधव, ज़रूरी नहीं कि हर प्यासे की प्यास बादल ही बुझाए। कभी-कभी उम्मीद का असली झरना हमारे भीतर से फूटता है।” माधव ने रोते हुए अपनी आँखों के आँसू पोंछे। उन आँसुओं ने उसकी आँखों की जलन को तो शांत किया ही, साथ ही उसके भीतर छिपे डर को भी बाहर बहा दिया।

माधव को समझ आ गया कि बादलों के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर बैठने से कुछ नहीं होगा। आँखों के पानी ने उसके भीतर के रोष और दुःख को पिघलाकर एक संकल्प में बदल दिया था। उसने गाँव के युवाओं को इकट्ठा किया। बादलों की आस छोड़कर, उन्होंने मिलकर ज़मीन को और गहरा खोदना शुरू किया। कई दिनों की कड़ी मेहनत के बाद, सूखी धरती के सीने से पानी का एक साफ़ झरना फूट पड़ा।

गाँव की प्यास बुझ चुकी थी। माधव ने मुस्कुराते हुए आसमान की तरफ देखा और समझा कि जब बाहर के बादल साथ छोड़ देते हैं, तब इंसान की आँखों से निकले बेबसी के आँसू ही उसे अंदर से मजबूत बनाते हैं और जीने का नया रास्ता दिखाते हैं।

बाजारवाद के चलते हर आदमी सभी सुख सुविधाएं ललचाती हैं। लेकिन बुद्धि और विषम परिस्थितियों और समय की अनुकूलता से वांछित चीजें या खुशी आदमी को नहीं मिलती। इसका मतलब ये नहीं आदमी हाथ पर हाथ रखकर बैठा रहे, उसे यथासंभव युक्ति युक्त तरीके स्वप्न ज्ञान और अनुभव के आधार पर सकारात्मक भाव से पर्याप्त प्रयास करना चाहिए। कोई भी कार्य जो पूरी लग्न से किया जाए तो उसमें सफलता मिलती है।

– राजेंद्र रंजन गायकवाड

बिलासपुर 25/07/2026

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