सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री / लेखिका / शिक्षिका / रिपोर्टर / उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
‘कलम के सिपाही’
(कविता)
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कलम के सिपाही बोल पड़ते हैं उनके शब्द,
हिंदी के युगप्रवर्तक रचनाकार मुंशी प्रेमचंद।
पढ़िए कभी-रंगभूमि, कर्मभूमि, गबन,गोदान,
मन की सिसकियाँ, बेबसी और दिखेगा रुदन।
भावों के समंदर हैं जिसमें विविध रंग,
न अतीत की केवल गाथा, न भावी कोरी कल्पना।
मानव की व्यथा का किया है मार्मिक चित्रण,
यथार्थ और सहानुभूति का जिसमें है समन्वय।
उपन्यास और कहानी में जिनकी जादू भरी लेखनी,
विश्व का जनसमूह आप पर करता है गर्व।
विषमताओं और कटुता को आपने सहजता से झेला,
सरलता, सौम्यता और उदारता की थे आप मूर्ति।
आडंबर और दिखावे से रहते थे सदा दूर,
गरीबों के प्रति सहानुभूति के बने थे सागर।
अपूर्व जीवनी-शक्ति के थे वे प्रतीक,
संघर्ष से ही सृजित किया उन्होंने कथा-साहित्य।
ग्रामीण जीवन से जिन्हें था असीम प्रेम,
स्वयं ही पूर्ण करते थे अपना हर काम।
धनपत राय था वास्तविक जिनका नाम,
राष्ट्र-उपयोगी विचारों से बने जो महान।
साहित्यिक क्षेत्र में अमूल्य है आपका योगदान,
कहलाते हैं आप महान उपन्यास-सम्राट।
शोषकों और दीन-दुखियों के बने कर्णधार,
करते हैं आज आपको शत-शत नमन।







