खून के आंसू रो रहा किसान

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हरी राम यादव 

अयोध्या, (उ. प्र.)

 

         (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

          खून के आंसू रो रहा किसान

 

इस मौसम की बरसात ने,

किया बहुत बड़ा नुक्सान ।

आंधी पानी के झोंकों से,

खून के आंसू रो रहा किसान।

खून के आंसू रो रहा किसान,

धान की फसल हुई चौपट।

गिरा पौध जो खड़े धान का,

वह न लांघेगा घर की चौखट।

लोट गया जमीन पर जो गन्ना,

घटे विकास होगा नौ टेढ़ा ।

जान की आफत बना वह,

कटनी छिलनी सब होगा रेढा।।

 

 

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