राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
हे लेखक!
लिखो वही, जिस पर अपना नाम लिख सको,
जिस लिखावट में कोई छल न छिपा हो,
जिसके अक्षरों से तुम्हारा चेहरा न छिपे,
तुम गर्व से कह सको, यह मेरा लिखा है।
सोचो वही, जो जुबान पर सहज आ सके,
जो दिल की गहराई से निकले बिना डर के,
जो रात के अँधेरे में भी साफ साफ दिखे,
सुबह के उजाले में न झुठलाया न जाए।
बोलो वही, जिसका जवाब सुनने की हिम्मत हो,
जिसकी प्यारी गूँज तुम्हारे कानों में बस जाए,
आलोचना हो या सराहना दोनों को गले लगाओ,
क्योंकि सच वही है, जो सुनने लायक हो हमेशा।
करो वही, जिससे हर दिल खुश हो,
जहाँ शब्द और कर्म में कोई दरार न हो,
कर्म और आवाज़ तुम्हारा प्रतिबिंब बने,
पूरा जीवन एक ऐसी कविता हो, “रंजन”
जिसके हर भाव पे, हस्ताक्षर कर सको।






