बाल कृष्ण मिश्रा
नई दिल्ली
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
“सबसे ऊपर संविधान”
हाथ में तिरंगा, दिल में वतन,
कर देंगे गद्दारों को दफन!
तिरंगा हाथ में, आग दिल में है,
भारत का हर युवा अब महफिल में है।
गद्दारी का अब एक ही अंजाम होगा,
हर जवाब अब संविधान से होगा।
जाग गया अब देश का युवा,
सिस्टम का होने वाला है ‘धुआँ-धुआँ’!
जो देश बेच कर भाषण देते,
वो ही हर दिन देशभक्ति के नारे देते!
कुर्सी के आगे झुकता ईमान—
जनता पूछे, “कहाँ है संविधान?”
सवाल उठे तो डरना कैसा, लोकतंत्र है—
कलम उठेगी, वोट बोलेगा, सच का
सूरज फिर से डोलेगा।
जागा युवा, जागा हिंदुस्तान, गूँजे फिर
से संविधान!
जनता जागी, बदला मिजाज, अब
सवालों का होगा राज!
युवा कहे—हम साथ चलेंगे, झूठ के आगे
नहीं झुकेंगे।
तिरंगा ऊँचा, ऊँचा सम्मान, दिल में
भारत, हाथ में संविधान!
नफ़रत हारें, प्रेम जगे,
भारत के हर कोने में दीप जले।
जन-जन बोले एक ही गान—
“सबसे ऊपर संविधान!”
सच की लौ जब जलती है, झूठ की
दुनिया पिघलती है!
हाथ में तिरंगा, दिल में वतन, सच की
राह पर बढ़ते कदम।
भारत माता का यही सम्मान—
न्याय, समानता और संविधान!
जाग गया अब हिंदुस्तान, गूँज रहा—
जय संविधान!
जनता कहती एक विधान—
“वोट सुरक्षित, तभी लोकतंत्र महान!”
नारी का हो पूर्ण सम्मान,
तभी सुरक्षित होगा हिंदुस्तान!
न हिंसा चाहिए, न कोई वार,
सवाल हमारा सबसे बड़ा हथियार!
जनता जागी, युवा जवान—
सबसे ऊपर संविधान!
धुआँ-धुआँ… धुआँ-धुआँ!
झूठ-फरेब का धुआँ-धुआँ!







