वजीरगंज के नगवा और जमुआ में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन, 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात, 26 परिवारों में हड़कंप।

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ब्यूरो गोंडा वजीरगंजः सियाराम पाण्डे

          (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)

 

वजीरगंज के नगवा और जमुआ में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन, 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात, 26 परिवारों में हड़कंप।

 

 

         गोंडाः वजीरगंज थाना क्षेत्र के नगवा और जमुआ गांव में सरकारी जमीन पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण के खिलाफ आखिरकार प्रशासन ने रविवार को बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी। खलिहान और खाद गड्ढे की जमीन पर बने 26 पक्के-कच्चे मकानों को खाली कराने के लिए सुबह से ही प्रशासन का अमला गांव में पहुंच गया। कार्रवाई को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। मौके पर 300 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, साथ ही फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीम को भी स्टैंडबाय पर रखा गया था।

 

       बुलडोजर चलने की खबर से गांव में सुबह से ही अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई परिवारों ने प्रशासन की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही रविवार सुबह 11 बजे से खुद अपने आशियाने तोड़ने शुरू कर दिए। कोई टीन शेड उखाड़ रहा था, तो कोई दीवारों से ईंट निकाल रहा था। महिलाएं घर के अंदर से बर्तन, कपड़े और अनाज की बोरियां बाहर निकालती नजर आईं।

 

     सालों पुराना है मामला, तहसील से लेकर

            हाईकोर्ट तक पहुंचा विवाद।

 

      प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार नगवा और जमुआ में खलिहान और खाद गड्ढे के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का यह मामला नया नहीं है। यह मामला पिछले कई वर्षों से तरबगंज तहसील में लंबित था। राजस्व विभाग की टीम ने कई बार मौके पर पैमाइश की और अतिक्रमणकारी परिवारों को नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए थे।

 

      तहसील प्रशासन का कहना है कि कई बार नोटिस देने के बावजूद किसी ने जमीन खाली नहीं की। जिसके बाद राजस्व विभाग ने बेदखली की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की। इसी बीच नगवा गांव के निवासी पराग दत्त मिश्रा ने इस पूरे अतिक्रमण को लेकर लखनऊ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि गांव की सार्वजनिक उपयोग की जमीन, जो खलिहान और खाद गड्ढे के लिए सुरक्षित है, उस पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बना लिए गए हैं और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

 

      हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी गोंडा प्रियंका निरंजन को 5 अक्टूबर को शपथ पत्र के साथ तलब किया है। कोर्ट की सख्ती के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और रविवार को अतिक्रमण हटाने की तारीख तय की गई।

 

        सुबह से ही गांव में मचा रहा कोहराम,

          खुद ही आशियाना तोड़ते दिखे लोग।

 

            रविवार सुबह जब राजस्व टीम पुलिस बल के साथ नगवा पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद भावुक कर देने वाला था। बुलडोजर गांव की सीमा पर खड़ा था और मुनादी हो रही थी कि सभी लोग सरकारी जमीन से अपना अतिक्रमण हटा लें। इसके बाद कई परिवारों ने खुद ही अपने घर तोड़ने शुरू कर दिए ताकि उनके ईंट और सरिया के पैसे बच जाएं।

 

                  मौके पर मौजूद महिलाओं की आंखों में आंसू थे। एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह पिछले 20 साल से यहां रह रही है, अब उसके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं है। वहीं एक युवक ने बताया कि उसने मजदूरी करके एक-एक ईंट जोड़कर अपना घर बनाया था, लेकिन आज उसे खुद ही उसे तोड़ना पड़ रहा है।

 

           जिन परिवारों ने पहले से दूसरी जगह व्यवस्था कर ली थी, उन्होंने अपना सामान निकाल लिया था, लेकिन कई ऐसे परिवार भी थे जिनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक जमीन नहीं थी। वे हाथ जोड़कर प्रशासन से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाते रहे। पूरे गांव में रोने-पीटने और सामान समेटने का दौर चलता रहा।

 

   कानून व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस,

                बड़े अधिकारी रहे मौजूद।

 

           प्रशासन को आशंका थी कि कार्रवाई के दौरान विरोध या टकराव की स्थिति बन सकती है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मौके पर मुख्य राजस्व अधिकारी रिंकी जायसवाल, एसडीएम तरबगंज सविता शुक्ला स्वयं मौजूद रहीं। उनके साथ महिला थाना प्रभारी अनीता यादव, वजीरगंज थाना प्रभारी दिनेश प्रताप सिंह, कई हल्का लेखपाल, कानूनगो और 300 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी के जवान तैनात रहे।

 

         किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ी और स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस भी मौके पर तैनात की गई थी। ड्रोन कैमरे से भी पूरे गांव की निगरानी की जा रही थी। अधिकारियों ने पहले दोनों गांवों में मुनादी कराकर लोगों को शांतिपूर्वक जमीन खाली करने की अपील की।

 

            एसडीएम तरबगंज सविता शुक्ला ने बताया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमानुसार और हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में की जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी पक्षों को पर्याप्त समय और नोटिस दिया गया था। सरकारी जमीन पर कब्जा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खलिहान और खाद गड्ढे की जमीन गांव के सार्वजनिक हित के लिए होती है, उस पर निजी निर्माण अवैध है।

 

        मुख्य राजस्व अधिकारी रिंकी जायसवाल ने बताया कि नगवा और जमुआ में कुल 26 मकान चिन्हित किए गए हैं जो पूरी तरह से सरकारी जमीन पर बने हैं। इनमें से कुछ मकान पूरी तरह पक्के बने हैं, जबकि कुछ टीन शेड और कच्चे मकान हैं। सभी को हटाकर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।

 

26 अतिक्रमणकारी चिन्हित, इनके मकानों पर हुई कार्रवाई

 

                   प्रशासन द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार इस कार्रवाई में 26 लोगों के अतिक्रमण शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से ओम सिंह, छांगुर माली, सतनू सिंह, तिलक राज सिंह, शैलेश सिंह, दद्दन सिंह, समसुद्दीन हलवाई, नईम, पारस नाथ सिंह, जयपाल सिंह सहित अन्य 16 परिवार शामिल हैं।

 

                   राजस्व विभाग के अनुसार इन सभी परिवारों ने खलिहान की जमीन पर अपने मकान बना लिए थे। कुछ लोगों ने तो सरकारी जमीन पर पक्की चारदीवारी करके उसे अपनी निजी संपत्ति में शामिल कर लिया था। पैमाइश के दौरान यह साफ हो गया कि यह सभी निर्माण राजस्व अभिलेखों में खलिहान और खाद गड्ढे के खाते में दर्ज जमीन पर हैं।

 

      ग्रामीणों में दो तरह की प्रतिक्रिया, कुछ ने कहा

           सही हुआ तो कुछ ने कहा बेघर हो गए।

 

          इस कार्रवाई को लेकर गांव में दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई बिल्कुल सही है, क्योंकि सार्वजनिक जमीन पर कब्जा होने से गांव के गरीब किसानों को खलिहान के लिए जगह नहीं मिल पाती और खाद गड्ढे की जमीन न होने से गंदगी फैलती है। वहीं दूसरी ओर जिनके मकान टूटे हैं, उनका कहना है कि वे कई दशकों से यहां रह रहे हैं और उनके पास अब कोई ठिकाना नहीं बचा है।

 

             एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांव में प्रधान और लेखपाल की मिलीभगत से यह अतिक्रमण हुआ था। अगर शुरू में ही रोक दिया जाता तो आज इतने परिवार बेघर नहीं होते।

 

             वहीं मानवता के आधार पर गांव के ही कुछ लोगों ने बेघर हुए परिवारों को अपने दरवाजे पर अस्थायी रूप से शरण दी है और उनके खाने-पीने की व्यवस्था में मदद कर रहे हैं।

 

आगे क्या होगा?

 

               फिलहाल प्रशासन ने दोनों गांवों में सरकारी जमीन को खाली कराकर उस पर लाल झंडी और निशान लगा दिए हैं और बोर्ड लगा दिया है कि यह जमीन सरकारी है, इस पर अतिक्रमण करना दंडनीय अपराध है। अधिकारियों का कहना है कि खाली कराई गई जमीन को अब अपने मूल स्वरूप में लाया जाएगा और वहां खलिहान और खाद गड्ढे के लिए उपयोग किया जाएगा।

 

           

 

           ओओइस कार्रवाई के बाद पूरे वजीरगंज तहसील क्षेत्र में उन लोगों में हड़कंप मचा हुआ है जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में ऐसी कार्रवाई अन्य गांवों में भी जारी रहेगी।

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