राजेन्द्र रंजन गायकवाड (सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक) बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w)6395080071
गजल
किस पन्ने पर किस विधा में, अब क्या लिखूँ,
भावों की महफ़िल है, मगर जज़्बात कहाँ हैं।
कलम थक गई, आँखों में आँसू भर आए हैं,
उड़ रहे हैं पंख, पता नहीं परिंदा उड़ा कहाँ है।
यादों के आँगन में बिखरे हैं आधे अधूरे सपने,
कौन सुन रहा है किस्से, संघर्ष थमा कहाँ है।
चाँदनी रातों में लिखी, गजल अकेली सी है,
अल्फाज नहीं, नजारों की मंजरकशी कहाँ है।
फिर लिखता हूँ मैं, ये जुनून न रुकेगा कभी,
कल कोई पूछेगा जरूर, आज ‘रंजन’ कहाँ है।






