सुश्री सरोज कंसारी लेखिका एवं कवयित्री नवापारा राजिम, रायपुर (छ. ग)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड (w) 6395080071
लेख:
हिम्मत से जीत जाना : सुश्री सरोज कंसारी
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हम अपनी आंतरिक शक्ति बनाए रखें, यही प्रयास रहे। मत सोचो! दुख में कोई नहीं, समझो यहीं हकीकत है। तुम्हें अपने साथ हमेशा रहना है – हिम्मत से। जीत के लिए प्रयास करना जरूरी है। हारने के बाद ही जीत की संभावनाएं अधिक होती हैं। आपके प्रत्येक कर्म और सोच में गहराई होना जरूरी है। टूटने-छूटने और रूठने का समय है यह। कमी नहीं करते लोग आपके जख्म को ताजा करने में, इसलिए भावुक मत रहिए। हर कड़वाहट भरी भावना को मिठास बनाते चलिए।
जिंदगी की परेशानियों से घबराइए मत! जीना है तो साहसी बनिए। एक दिन तो मरना ही है। घुटन भरी जिंदगी से निकलिए। अगर हर क्षण का आनंद लेना है, तो ज्यादा मत सोचिए! मजबूत बनिए। जो बीत गया उसे जब तक भूलेंगे नहीं, तब तक आज को नहीं संवार सकते। मोह वहीं तक ठीक है जिससे आपके आत्म-सम्मान को चोट न लगे। जो है सो है के सिद्धांत पर चलिए, जो नहीं है उसके लिए व्याकुल होना छोड़ दीजिए। एक फैसला कीजिए और मन को एकाग्र कीजिए। चाहे जो हो जाए, हर किसी की बात सुनकर मन को बदलिए मत। जो सपने देखे हैं उसे पूरा होते तक डटे रहिए।
आपका भला किसमें है? यह सोचने की जिम्मेदारी खुद की है। याद रखिए! आज व्यस्त हैं लोग अपने जीवन में। किसी के ऊपर अपनी पूरी जिम्मेदारी मत सौंपिए। जितना खुद से कर सकते हैं, उसकी शुरुआत कीजिए। जो बिल्कुल नहीं कर सकते उसे सलाह-मशवरा कीजिए, सीखिए जीना। खुद को दुखी समझना, तरस खाना छोड़ दीजिए। तूफान है जिंदगी का, हर लम्हा अस्त-व्यस्त हो सकते हैं पर पूरी तरह बिखरिए मत। मजबूती से रहना जरूरी है जीवन के हर क्षेत्र में। सुधरने-संभलने की हर वो कोशिश कीजिए, जिससे आप गिरकर फिर से उठ सके। भ्रम है यह जीवन, खुद से बड़ा कोई हमदर्द नहीं आपका, यह बात अच्छी तरह समझ लीजिए। पर आप अपने कार्य-व्यवहार और सोच के प्रति स्पष्ट रहिए। जीवन को समस्या कभी न समझें, ये तो यात्रा है जो नदी की तरह है, जो रुकती नहीं है।






