ब्रह्मचारिणी की तपस्या में, ज्ञान का दीप जलता है..साधना के पथ पर!

Spread the love

 

सुश्री सरोज कंसारी

कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका

नवापारा/राजिम

रायपुर, (छत्तीसगढ़)

 

 

                    (नया अध्याय, देहरादून)

 

                               आलेख:

         ब्रह्मचारिणी की तपस्या में, ज्ञान का दीप जलता                            है..साधना के पथ पर!

                 — सुश्री सरोज कंसारी

        ______________________________

 

ब्रह्मचारिणी माता नवरात्रि के दूसरे दिन पूजी जाने वाली दुर्गा का एक रूप हैं। उनका नाम ‘ब्रह्म’ और ‘चारिणी’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ- ‘ब्रह्म का पालन करने वाली’। तपस्या की दीप जला, ब्रह्मचारिणी आई – यह पंक्ति उनकी तपस्या और ज्ञान की प्रतीक है।

 

ब्रह्मचारिणी माता का महत्व:

  ज्ञान और तपस्या की देवी

  ब्रह्मचर्य और संयम की प्रतीक

  नवरात्रि के दूसरे दिन पूजा की जाती है।

 

चलना जोत जलाबो माता के भुवन मा चलना जोत जलाबो..से गुंजित हुई धरा। सेवा, समर्पण, भक्ति की असीम शक्ति का पर्व चैत्र नवरात्र। मंदिर में शंखनाद, घंटनाद, पूजा की थाल में रोली, अक्षत, गुलाल, श्रीफल, सुंदर फूलों की सुगंधित माला, ढोल-नगाड़े, मंजीरे की थाप, त्रिशूल-भालें की शौर्य गाथा, मंदिरों की जगमग रोशनी, मनोकामनाओं की प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति की पंक्ति, जवारे की लहलहाती फसल, खीर-पूड़ी, हलवे के भोग, लाली चुनरी, चारों तरफ बहती है भक्ति की बयार। प्रकृति में समाहित होती है आस्था-श्रद्धा-विश्वास। मन में शांति-एकाग्रता-ध्यान, स्तुति-प्रार्थना के भाव से जिंदगी आध्यात्म की दिशा में अग्रसर होती है। ऐसा लगता है मानो आत्मा तृप्त हो गई। यूं ही माता की अराधना करते जीवन बीत जाए, ये पल यहीं ठहर जाएं। सांसारिक भोग-विलास से दूर, भटकाव की कोई राह न हो। एक ही मंजिल हो, जहां करुणा-दया, ममता-स्नेह की छाया मिले। शोक-संताप, पछतावे के लिए फुर्सत ही न मिले। काश! जीवन में सत्संग, सत्कार्य के अवसर इसी तरह मिले, यह मनुष्य तन सार्थक हो जाए।

 

भारतीय संस्कृति में हर पग पर उत्सव होते हैं, जो थके हुए मानस मन को विश्राम के आनंद के और उमंग के कुछ पल देते हैं। लेकिन धार्मिक कार्य व आयोजन सुकून के कुछ अमूल्य क्षण प्रदान करते हैं। जो आज की सबसे बड़ी जरूरत है। माहौल में जो उदासी घुली होती है, उसमें खुशियों की बौछार होती है। वैसे ही एक माह है, जिसका इंतजार हर भारतीय को होता है, जो भक्ति की पराकाष्ठा का पर्व है, वह है चैत्र माह, जो पूजन, यज्ञ-हवन, शुभकर्म का प्रतीक है। बहुत ही पावन महीना, इसी में चैत्र नवरात्र होता है। हर चारों दिशाएं आनंदित होती हैं, चेहरों में मुस्कान होती है, एक अलौकिक आनंद मिलता है। चैत्र माह की नवरात्र में नौ दुर्गा की अराधना कर भक्त अति प्रसन्न होते हैं और अपनी क्षमता अनुसार मां जगदम्बे की सेवा में दिन और रात समर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है, कि शुद्ध भाव से निज स्वार्थ से ऊपर उठकर मानवता की मंगल कामना के लिए जो भी कार्य किया जाता है, वह अवश्य पूरी होती है।

 

वैसे तो अनेक विधियां हैं मां की सेवा के, जिनमें मां का श्रृंगार, ज्योत का ध्यान करना, उसे बिना बाधा के प्रज्ज्वलित करने के जतन करना, जवारा में पानी देना, जिससे माता का आशिर्वाद मिलता है और जीवन खुशहाल होता है। भक्तों की भक्ति की कोई सीमा नहीं। छोटे बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग तक भक्ति की गंगा में डुबकी लगाते हैं, व्रत करते हैं और रात भर जागरण कर माता की भजन-कीर्तन में समय व्यतीत कर जीवन को धन्य करने का प्रयास भक्तगण करते हैं। माता को प्रसन्न करने के लिए जसगीत व माता जगराता भजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। वाद्य यंत्र के द्वारा कर्णप्रिय धुन में सुमधुर जसगीत में एक अलग आकर्षण होता है, जिसे सुनकर सभी झूमने पर विवश हो जाते हैं। बिना सेवा गीत के नवरात्र की कल्पना ही नहीं की जा सकती। सेवागीत व हिंदी में देवी भजन जहां होते हैं, समय का पता नहीं चलता। देवी भजन में लीन होकर रात भर उनका ध्यान करना, झूमना, तालियों की गूंज की जाती है, उसे जगराता कहा जाता है। जस गीत में मातारानी के श्रृंगार, उसके गुण व महिमा का बखान किया जाता है। आदि शक्ति भवानी के शांत, शीतल व क्रोधित रूप का वर्णन किया जाता है। बताया जाता है कि जब प्रकृति अनुकूल दिशा में होती है, जनहित के कार्य होते हैं, सर्वे भवन्तु सुखिन: वसुदेव कुटुंबकम की सुंदर भावना होती है, जहां सद्भावना-धार्मिक आयोजन होते हैं, वहीं माता शांत रूप में आस-पास ही विराजित होती हैं और भक्तों की विनती सुनती हैं। लेकिन जहां आतंक-अत्याचार होते हैं, शोषित-पीड़ित, दुखी-बेबस लोगों को सताया जाता है, मां-बहन, बेटी का सम्मान नहीं होता, वहशी दरिंदे अपनी बुरी नजर का शिकार मातृशक्ति को बनाते हैं, जहां झूठ-छल, कपट-मिलावट, घूसखोरी होती है, उस स्थान पर माता अपने विकराल रूप में होती हैं, अर्थात क्रोधित होकर अत्याचार मिटाने के लिए किसी न किसी रूप में अवश्य अवतरित होती हैं।

 

 

सेवा कार्य, जगराता और जसगीत ही एक माध्यम है, हृदय में मानवीय गुण को विकसित करने का। जिससे कुविचारों का अंत होकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवरात्र में आसपास मंदिर, देवालयों और गली-मुहल्ले, घरों में देवी जसगीत की धूम होती है, जैसे-माता ला नींद आवय ओ भवर पलंग मा मैया तोला नींद आवय.. नव दिन बर आए वो पहुना बरोबर दाई हे दुर्गा हे महामाई.. माटी के दुर्गा तोला बैठारेव… शारद मोर शक्ति माय.. चलना जोत जलाबो माता के भुवन मा चलना जोत जलाबो.. मोर गांव के शीतला दाई तोला बंदव वो… जैसे भक्तिपूर्ण सेवागीत गुंजायमान होती हैं इस धरा में। जिसे सुनकर मन डूब ही जाता है। मां भवानी की भक्ति में इस सुमधुर जसगीत के माध्यम से भक्त अपनी मन की व्यथा, पीड़ा और दर्द को भी व्यक्त करते हैं और मातारानी से सारे संसार के कष्टों को हरकर सुख-समृद्धि स्थापित करने की प्रार्थना भी करते हैं। चैत्र नवरात्र का यह पर्व नई उमंग और उत्साह का भक्ति से सराबोर धार्मिक पर्व होता है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं होती। शक्ति के नव रूपों में हम मातृशक्ति को सदा सम्मान देने का संकल्प लेते हैं। माता का हर रूप मनभावन होता है। भक्ति का मार्ग ही जीवन जीने का सही मार्ग है। आईए इस भक्ति के रंग में हम भी रंग जाएं और समस्त संसार की खुशहाली के लिए मंगल कामनाएं करें।

______________________________

 

 

  • Related Posts

    आँख खुले बस तेरी बातें, बन मीठी यादें घुलती हैं,

    Spread the love

    Spread the love    कवयित्री चन्द्रमती चतुर्वेदी (चन्दू )  बस्ती, अयोध्या धाम                (नया अध्याय, उत्तराखण्ड)   आँख खुले बस तेरी बातें, बन मीठी यादें…

    डॉ. रामदेव शर्मा ‘राही’ हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित हुए – कवि संगम त्रिपाठी।

    Spread the love

    Spread the love   ब्यूरो मथुराः अनामिका  सिन्हा           (नया अध्याय, उत्तर प्रदेश)   डॉ. रामदेव शर्मा ‘राही’ हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित हुए        …

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    नवीन बिष्ट को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया।

    • By User
    • October 2, 2026
    • 6 views
    नवीन बिष्ट को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया।

    आँख खुले बस तेरी बातें, बन मीठी यादें घुलती हैं,

    • By User
    • October 2, 2026
    • 11 views
    आँख खुले बस तेरी बातें, बन मीठी यादें घुलती हैं,

    सेवा संकल्प अभियान के तहत मासी में आयोजित शिविर में 810 लाभार्थियों को मिला विभिन्न योजनाओं का लाभ।

    • By User
    • October 2, 2026
    • 4 views
    सेवा संकल्प अभियान के तहत मासी में आयोजित शिविर में 810 लाभार्थियों को मिला विभिन्न योजनाओं का लाभ।

    डॉ. रामदेव शर्मा ‘राही’ हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित हुए – कवि संगम त्रिपाठी।

    • By User
    • October 2, 2026
    • 12 views
    डॉ. रामदेव शर्मा ‘राही’ हिन्दी सम्मेलन में सम्मानित हुए – कवि संगम त्रिपाठी।

    “समय” 

    • By User
    • October 2, 2026
    • 11 views
    “समय” 

    मंडी के अभाव में किसानो को मिल रहे कम दाम, केवल लहसुन-प्याज और संतरे के सीजन में होता है मंडी का उपयोग।

    • By User
    • October 2, 2026
    • 11 views
    मंडी के अभाव में किसानो को मिल रहे कम दाम, केवल लहसुन-प्याज और संतरे के सीजन में होता है मंडी का उपयोग।