राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
(लेख)
डिजिटल क्रांति और जमीनी हकीकत
प्रजातंत्र के स्तंभों के लिए एक चुनौती आज तकनीक का युग है। शिक्षा के क्षेत्र में कंप्यूटर और इंटरनेट के प्रवेश ने एक बड़ा बदलाव लाया है। इसने हमारी युवा पीढ़ी, किशोरों और यहाँ तक कि छोटे बच्चों को भी समय से पहले बहुत अधिक जागरूक और सतर्क बना दिया है। आज का बच्चा हर विषय पर अपनी राय रखता है। उसे दुनिया भर की जानकारी एक क्लिक पर मिल जाती है। लेकिन इस भारी जागरूकता के बीच एक बहुत कड़वी सच्चाई भी छिपी है।
एक तरफ हमारा समाज डिजिटल रूप से आगे बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ हमारी बुनियादी सुविधाएं (जैसे अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ पानी और सुरक्षित सड़कें) सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ रही हैं। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि लोगों को बुनियादी अधिकार मिलना तो दूर, मौजूदा व्यवस्थाएं भी तार-तार होती दिख रही हैं।ऐसी गंभीर स्थिति में हमारे प्रजातंत्र (लोकतंत्र) के सभी स्तंभों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्हें आगे बढ़कर एक सकारात्मक सोच के साथ बड़े बदलाव की दिशा में कदम उठाने की सख्त जरूरत है।
प्रजातंत्र के स्तंभों की भूमिका और आज की स्थिति प्रजातंत्र के चार मुख्य स्तंभ माने जाते हैं। आज के समय में इन चारों को मिलकर काम करने की जरूरत है विधायिका (कानून बनाने वाले) संसद और विधानसभाओं को केवल डिजिटल इंडिया की बातें करने से ऊपर उठना होगा। उन्हें ऐसे जमीनी कानून और नीतियां बनानी होंगी जिससे हर गरीब बच्चे को स्कूल और अस्पताल मिल सके। कार्यपालिका (सरकार और प्रशासनिक अधिकारी) अधिकारियों को कागजी दावों से बाहर निकलना पड़ेगा। इंटरनेट से जागरूक हुई जनता अब योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार को तुरंत पकड़ लेती है। इसलिए कार्यपालिका को पूरी ईमानदारी से बुनियादी सुविधाओं को जनता तक पहुँचाना होगा।
न्यायपालिका (अदालतें) जब बुनियादी सुविधाएं तार-तार होती हैं, तो आम आदमी की आखिरी उम्मीद अदालत होती है।न्यायपालिका को आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए और अधिक सक्रिय होना पड़ेगा।
मीडिया (चौथा स्तंभ) मीडिया को केवल सनसनीखेज खबरों या राजनीतिक बहसों में नहीं उलझना चाहिए। उन्हें टूटी सड़कों, बदहाल स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति को लगातार दिखाना होगा ताकि सरकार पर दबाव बने।डिजिटल जागरूकता बनाम जमीनी हकीकतआज इंटरनेट के कारण युवा और बच्चे बहुत कुछ सीख रहे हैं। वे जानते हैं कि एक अच्छे समाज में क्या-क्या सुविधाएं होनी चाहिए। लेकिन जब वे अपने आस-पास देखते हैं, तो उन्हें निराशा हाथ लगती है। स्कूलों की हालत: कंप्यूटर लैब तो दूर, कई सरकारी स्कूलों में बैठने के लिए ढंग के कमरे या छत तक नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवा इंटरनेट पर लोग बड़ी बीमारियों का इलाज ढूंढ रहे हैं, लेकिन हकीकत में गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं होते।भविष्य की चिंता अत्यधिक जागरूकता के कारण युवाओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उन्हें रोजगार के सही अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
सकारात्मक परिवर्तन के लिए आवश्यक कदमयदि हमें अपनी इस जागरूक पीढ़ी को सही दिशा में ले जाना है, तो प्रजातंत्र के सभी स्तंभों को तुरंत ये कदम उठाने होंगे जमीनी सुधारों को प्राथमिकता डिजिटल विकास के साथ-साथ बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चीजों को मजबूत करना होगा।सकारात्मक सोच का निर्माण इंटरनेट पर मौजूद नकारात्मकता से बच्चों को बचाने के लिए स्कूलों में नैतिक और व्यावहारिक शिक्षा देनी होगी। जवाबदेही तय करना: जो भी सरकारी विभाग बुनियादी सुविधाएं देने में फेल होता है, उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
अंत में मेरा आग्रह है कि कंप्यूटर और इंटरनेट ने हमारी पीढ़ी को आंखें और आवाज तो दे दी है, लेकिन उन्हें एक सुरक्षित और सुविधायुक्त भविष्य देना अभी भी व्यवस्था के हाथ में है यदि प्रजातंत्र के चारों स्तंभ आज भी जागरूक नहीं हुए, तो यह युवा शक्ति सही दिशा में आगे बढ़ने के बजाय हताश हो जाएगी। इसलिए समय की मांग है कि हम डिजिटल रूप से जितने आधुनिक बन रहे हैं, जमीनी स्तर पर भी उतने ही मजबूत और आत्मनिर्भर बने देश आज से ही आगे बढ़ाएं, भविष्य किसी ने नहीं देखा।






