राजेंद्र रंजन गायकवाड
(सेवा निवृत्त केंद्रीय जेल अधीक्षक)
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
हाई-रिस्क बिहेवियर (अति-खतरनाक व्यवहार) –
चाहे वह खुद को नुकसान पहुँचाना, भोजन न करना, आत्महत्या का प्रयास, दूसरों को परेशान करना, हिंसा, अवैध यौन संबंध, संपत्ति को नुकसान पहुँचाना, या समाज-विरोधी गतिविधियाँ हों – ये सब आधुनिक जीवन की चुनौतियों, मानसिक तनाव, सामाजिक-आर्थिक दबाव, पारिवारिक विघटन और मूल्यों के क्षरण से जुड़ी समस्याएँ हैं।
इन व्यवहारों पर नियंत्रण एक व्यक्ति, परिवार, समाज और सरकार – सबके सामूहिक प्रयास से ही संभव है। कुछ व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव इस प्रकार हैं:
1. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें
तनाव, अवसाद, अकेलापन और निराशा कई खतरनाक व्यवहारों की जड़ हैं। स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर नियमित मानसिक स्वास्थ्य जाँच और काउंसलिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
किसी भी व्यक्ति को आत्म-हानि या आत्महत्या के विचार आने पर तुरंत मदद लें।
परिवार और दोस्तों को संकेत पहचानने का प्रशिक्षण दें (अचानक व्यवहार में बदलाव, अलगाव, निराशा की बातें आदि)।
2. परिवार और समुदाय की भूमिका मजबूत करें
बच्चों और किशोरों के साथ खुला संवाद रखें। स्क्रीन टाइम कम करें, परिवार के साथ समय बिताएँ।
पड़ोस, स्कूल और मोहल्ले स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाएँ। “अगर कोई परेशान दिखे तो बात करें” का माहौल बनाएँ।
बुजुर्गों को भी अकेला न छोड़ें – उनके अनुभव और मार्गदर्शन का उपयोग करें।
3. शिक्षा और कौशल विकास
स्कूलों में मूल्य-आधारित शिक्षा, भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) और जीवन कौशल सिखाएँ।
युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर दें। बेकारी और निराशा कई अपराधों और हिंसा को जन्म देती है।
डिजिटल साक्षरता बढ़ाएँ ताकि गलत जानकारी, अफवाहें और हिंसक सामग्री का असर कम हो।
4. कानून और व्यवस्था को प्रभावी बनाएँ
अपराधों (हिंसा, यौन अपराध, संगठित अपराध आदि) पर सख्त और त्वरित कार्रवाई हो। पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिले।
नक्सलवाद जैसी समस्याओं के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विकास, शिक्षा और रोजगार के प्रयास जारी रखने होंगे।
बंधुआ मजदूरी और शोषण के खिलाफ मौजूदा कानूनों का सख्ती से पालन हो।
5. मीडिया और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी
हिंसा, आत्महत्या या अपराध को महिमामंडित करने वाली सामग्री पर नियंत्रण हो।
सकारात्मक कहानियाँ, सफलता के उदाहरण और समाधान-केंद्रित चर्चाएँ बढ़ाएँ।
6. आर्थिक और सामाजिक असमानता कम करें
गरीबी, असमानता और अवसरों की कमी कई खतरनाक व्यवहारों को बढ़ावा देती है। कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाएँ और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
सबसे महत्वपूर्ण बात: किसी भी व्यक्ति को “बुरा” या “खतरनाक” कहकर अलग-थलग न करें। समझ, सहानुभूति और समय पर मदद कई जिंदगियाँ बचा सकती है। समाज को दोष देने से पहले खुद से शुरू करें – अपने परिवार, पड़ोस और समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाएँ।
आपका यह सवाल समाज के प्रति आपकी चिंता दर्शाता है। ऐसे संवाद जारी रहें। अगर किसी विशेष पहलू (जैसे युवाओं के लिए उपाय, स्कूल स्तर के कार्यक्रम या मानसिक स्वास्थ्य) पर और विस्तार से चर्चा चाहिए, तो बताएँ।
जय हिंद।
मिलकर ही हम इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।





