सुश्री सरोज कंसारी
(कवयित्री, लेखिका व शिक्षिका)
रिपोर्टर एवं उद्घोषिका
नवापारा-राजिम, रायपुर (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड)
लेख:
गिरो, उठो और फिर लड़ो, यही जिंदगी है
: सुश्री सरोज कंसारी
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जिंदगी सरल राह नहीं, यह मुश्किलों से भरा दुर्गम सफर है। जहां हर पल एक नया संघर्ष तैयार रहता है। गिरकर उठना और चलना है। जो भी परिस्थिति आए उससे घबराना नहीं। अंदर से मजबूत होकर बाहर की चुनौतियों को सहजता से पार कर सकते हैं। ठोकर खाकर ही संभलने की कला सीखते हैं। जीवन जंग है, बिना लड़े हम सफल नहीं हो सकते। असफलता ही सफलता के नए मार्ग बनाती है। दर्द जीवन का हिस्सा है। सहन शक्ति जरूरी है हर क्षेत्र में। जीवन में आपको हर तरह के लोग मिलेंगे, उनसे सामंजस्य बनाए रखिए। निराश होने के कई कारण होते हैं, पर साहस के पग कभी रुकने नहीं चाहिए। सांसारिक जीवन में धोखा-दबाव, ताना-षड्यंत्र मिलते रहेंगे। शारीरिक-मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक, सामाजिक हर क्षेत्र में द्वंद्व की स्थिति निर्मित होगी। हर हाल में मानसिक संतुलन बनाए रखिए। मंजिल तक जाना है तो मेहनत और प्रयास कभी मत छोड़िए। जीवन में हताश होकर बैठना नहीं, चाहे कितनी भी दुखद स्थिति हो, फिर से उठने की क्षमता रखिए। अपने अधिकार, सम्मान, ख्वाहिश और अपनों के प्यार के लिए, हमें हर तरह से मजबूत बने रहना है। हर तरफ से हारकर भी जीतने की कोशिश करते रहना ही जीवन है। रुक जाने से विकास की राह पूरी तरह बंद हो जाती है, चलते रहने से एक उम्मीद बाकी रहती है।
निरंतर संघर्षरत रहते हुए हमें सतत विकास करते रहना है। जब तक जीवित हैं, उत्सुकता बनाए रखिए और कोशिश करते रहिए। जब मन में उदासी, हीन भाव और दर्द घर कर लेता है, तो हर लम्हा वीरान हो जाता है। जिनमें उत्साह नहीं, किसी के प्रति प्रेम का एहसास नहीं, वह जीवित होकर भी मृतप्राय हो जाता है। जीवन में बहुत सी कठिन परिस्थितियों से गुजरना होता है। गमगीन भी होते हैं। जिस बात की कभी कल्पना नहीं की होती, ऐसी घटनाएं भी होती हैं। कुछ हादसे हर खुशियां छीन लेते हैं। कुछ दर्द जीवन भर कम नहीं होते। हमें हर बार अपनी कमजोर स्थिति से ऊपर उठने की कोशिश करते रहना है। एक जगह गमगीन पड़े रहने से जीवन सच में व्यर्थ हो जाता है। और खोकर भी कुछ पाने की चाह हमें जीवन के अंधकार में भी नई रोशनी दिखाती है। जीवन के उतार-चढ़ाव, सुख-दुख और सफलता-असफलता के साथ ही जीवन जीना है। यह क्रम है, समय के साथ ही हमें चलना है। कर्मशील रहिए। जब तक जीवन है, एक शुरुआत और करते रहिए। सब कुछ भले ही न मिले, पर हर बार एक नई ऊर्जा आपको मिलेगी, कुछ कर गुजरने के लिए। अपनी कमियों को देखें, स्वीकार करें और सुधार कर लीजिए।
आत्मचिंतन कीजिए अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए। लगातार कठिनाई, दुख और दुर्घटनाओं से गुजरते हुए अकेले होने का अफ़सोस जरूर होता है। कभी-कभी मन टूट जाता है, थकान होती है, जीवन बहुत मुश्किल लगता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, वैसे-वैसे हम अधिक आत्म-विश्वासी, आत्मनिर्भर, मजबूत और परिपक्व हो जाते हैं। लड़ने-सहने और कार्य को व्यवस्थित करने की सक्रियता बढ़ जाती है। अपनी मानसिक दुर्बलता को दूर कर, जिद होनी चाहिए कुछ कर गुजरने की। जीवन में सब कुछ हारकर भी जीत सकते हैं, अपने धैर्य और उच्च मनोबल से। दिल छोटा नहीं, बड़ा रखिए, घबराने की बजाय हिम्मत से काम कीजिए, विनम्र बनिए। जब भी दुख से मन व्याकुल और परेशान हो, जी भर रो लीजिए और फिर से नए सिरे से जीने की तैयारी कीजिए। ठान लीजिए खुद को खोना नहीं है कमजोर होकर। जो खो गया उसका गम छोड़िए, क्या बाकी रह गया पाने के लिए उस पर ध्यान दीजिए। एक जगह बैठकर अफसोस मत करते रहिए, धीरे-धीरे ही सही, अविरल आगे बढ़ते रहना।







