प्रभारी सम्पादकः दिनेश शास्त्री
(नया अध्याय, देहरादून)
शक्ति पूजा ही सनातन का आधार
: आचार्य स्वयंबर सेमवाल
बदरीनाथ धाम: बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के धर्माधिकारी आचार्य स्वयंबर सेमवाल ने सभी सनातन धर्मावलम्बियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि शक्ति पूजा ही सनातन परम्परा का आधार है और इसी मार्ग से धर्म की मर्यादा का पालन संभव है। बदरीनाथ धाम में रविवार को भगवान बदरी विशाल के पूजन उपरांत रविवार को आचार्य स्वयंबर सेमवाल ने विशेष बातचीत में बताया कि सर्वपितृ अमावस्या सम्पन्न हो जाने के बाद आज रविवार से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व प्रारंभ हो गया है। इस अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर प्रांगण में विधि-विधान के साथ घटस्थापना की गई और इस भू वैकुण्ठ धाम की आराध्य भगवती उर्वशी का आह्वान किया गया। धर्माधिकारी सेमवाल ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन के साथ ही नवरात्रि के पावन अवसर पर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि के शुभारंभ से श्री बदरीनाथ तथा श्री केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं में उत्साह दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि समूचे उत्तराखंड में आदिशक्ति जगदम्बा अनेक रूपों में विद्यमान है। कहीं काली तो कहीं चण्डिका, कहीं दुर्गा तो कहीं भुवनेश्वरी के रूप में भगवती की पूजा अर्चना शुरू हो गई है। धरती को आसुरी शक्तियों से मुक्त करने के लिए ही भगवती जगदम्बा ने अलग अलग रूपों में अवतार लिया और जनमानस उसी रूप में पूजा अर्चना करता है।
आचार्य सेमवाल ने कहा कि चूंकि इस भू वैकुण्ठ धाम की आराध्य देवी भगवती उर्वशी हैं, इसलिए आज यहां घट स्थापना के साथ जगत जननी जगदम्बा का आह्वान कर पूजा अर्चना शुरू हो गई है और श्रद्धालु भगवान बदरी विशाल के साथ भगवती पूजन का धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष के दौरान श्री बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्म कपाल तीर्थ में देश विदेश के हजारों श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति की कामना के साथ पिंडदान किया। अलकनंदा नदी के पवित्र तट पर भी श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से स्नान पश्चात तर्पण कर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्म कपाल में पिंडदान और तर्पण का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष का समापन हो गया। पितृ पक्ष के बाद आज से शक्ति पूजा का पर्व आरंभ हो गया है। यह लोकल्याण का अद्भुत पर्व है जिसमें आसुरी शक्तियों के शमन के बाद लोकमंगल की कामना की जाती है। उन्होंने सभी धर्मावलंबियों से शक्ति पूजा के इस पर्व पर भगवती उर्वशी की आराधना करने की अपेक्षा करते हुए लोककल्याण की कामना की।
आचार्य स्वयंबर सेमवाल ने कहा कि भू वैकुण्ठ धाम बदरी विशाल के दर्शनों के साथ नवरात्रि पूजन परम सौभाग्य का विषय है और इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के यहां पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है।







