संवाददाता आगर मालवा : गोवर्धन कुम्भकार
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
अंतिम यात्रा की तस्वीर बनी सामाजिक
समरसता की मिसाल।
गांव में टूटी जात-पात की दीवारें दो समाज,
दो अर्थियां एक हुआ पूरा गांव।
आगर मालवा: जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम फतेहपुर मेंढकी में एक दिन पहले एक साथ निकली दो अंतिम यात्राओं की तस्वीर अब सामाजिक समरसता की मिसाल बन गई हैं।
यहां ब्राह्मण समाज के 67 वर्षीय सत्यनारायण शर्मा और अनुसूचित जाति वर्ग के 65 वर्षीय नारायण मालवीय के निधन के बाद ग्रामीणों ने दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकालकर जात-पात से ऊपर उठकर इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया था।
अब मंगलवार को इस पहल की गांव ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी खासा चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि, दोनों परिवारों के दुख की घड़ी में पूरा गांव उनके साथ खड़ा हुआ है। यही कारण है कि, दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं और माकड़ौन से बुलाए गए बैंड – बाजे के साथ अंतिम यात्रा गांव की गलियों से होकर निकली। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान जाति और समाज का भेद कहीं नजर नहीं आया। दोनों परिवारों के लोग एक-दूसरे के दुख में सहभागी बने और ग्रामीणों ने भी इसे पूरे गांव का दुख मानकर अंतिम विदाई दी।
फतेहपुर मेंढकी में सामने आई ये तस्वीर इसलिए भी खास बन गई, क्योंकि अंतिम विदाई के दौरान सामाजिक पहचान पीछे छूट गई और इंसानियत का रिश्ता सबसे ऊपर दिखाई दिया। ग्रामीणों की इस पहल ने यह संदेश दिया कि दुख और संवेदना किसी जाति या वर्ग की सीमा में बंधे नहीं होते।







