सुश्री सरोज कंसारी
कवयित्री/लेखिका/शिक्षिका
नवापारा/राजिम
रायपुर, (छत्तीसगढ़)
(नया अध्याय, उत्तराखण्ड) (w) 6395080071
मन की शक्ति बनाएं रखना ही सच्ची उपासना हैं।
मन को शक्तिशाली बनाकर ही हम इस जीवन को सुंदर- सरल औऱ शांत बना सकते हैं। विचलित मन से किसी भी समस्या का समधान ढूंढ़ पाना संभव नहीं। उलझें -बिखरे और दुख में डूबे मन से हम अपने जीवन को बोझिल बना लेते है। मन को मजबूत बनाकर हर चुनौतियों का सामना किजिए। स्वस्थ मानसिकता के विकास के लिए अगर ठान ले तो, जीवन की बहुत सी समस्याएं दूर हो जाएंगी। अक्सर हम उन बातों में अधिक ध्यान केंद्रित कर लेते हैं, जो हमरी शारीरिक -मानसिक ऊर्जा को नष्ट करती है। जीवन में कई क्षेत्र होते है जहां -मन में किसी बात को लेकर चिंता बनी रहती हैं। हम बेवजह की बातों में बर्बाद करते हैं। अपनी कमजोर स्थिति से ऊपर उठने के लिए हमें, हर बार गिरकर उठने की चाहत रखनी होगी।
मन केंद्र हैं -संपूर्ण चिंतन का जिससे हम अपने जीवन को मार्गदर्शन दें सकते हैं। सही सोच,अच्छे कार्य औऱ व्यवहार से सुखद जीवन का निर्माण कीजिए। खुद को कभी सजा मत दीजिए। सभी रास्ते बंद होने के बाद भी मन के दरवाजे हमेशा खुला रखिए। मन की शक्ति से बढ़कर कुछ नहीं। किसी भी परिस्थिति में हीन भाव मत रखिए। मन में सकारात्मक भाव रखिए.हार गए कोई बात नहीं, फिर से कोशिश किजिए। जीवन में अंतिम सांस तक उम्मीद रखिए। जरुरी नहीं एक ही बार में सब कुछ मिल जाएं, अपनी इच्छाओ को नियंत्रित किजिए, जिद अच्छे कार्य के लिए किजिए।
बिना साधना के सिद्धि नहीं मिल सकती। जब -सांसारिक जीवन की जिम्मेदारियो को निभाते थकान होती हैं,कोई कष्ट होता हैं औऱ सब तरफ से हार जाते हैं, तब मन आध्यात्म की ओर झुकता हैं। जहां – हमें अंधेरों में विश्वास की एक नई रोंशनी मिलती हैं। जब मन गमगीन होता हैं और कोई समाधान नहीं मिलता, तब- हम आत्मा से जुड़ते हैं। दुख की घड़ी में हम भगवान क़ो करीब पाते हैं। आत्म बल मिलता है। जब रोकर हम अपने दिल की बात अपने आराध्य से कहते हैं तब- आंसू के रूप में हमारे दुख -शोक और अफसोस बहते हैं।पवित्र मन से की गई प्रार्थना का जीवन में गहरा असर होता हैं।आत्मिक शक्ति का संचार होता। मन का हर बोझ हल्का हो जाता हैं। सुप्त शक्ति जागृत होती हैं। नकारात्मक भावनाएं जब मिट जाती हैं तब हम सही दिशा में कदम रख पाते हैं। मन से दुर्भाव के अंत से ही, एक नई शुरुवात हम कर पाते हैं। हर दुविधाएं मन को कमजोर करती हैं। संदेह की स्थिति में हम किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाते।
कोई, कैसे भी बर्ताव करें मन को कभी विचलित न होने देना। अपने अच्छे स्वभाव को कभी बदलना मत। किसी से बदला लेने की मत सोचना। अडिग रहना अपने लक्ष्य को पाने के लिए। आपकी दृढ़ इच्छा ही आपकी सबसे बड़ी आपकी ताकत हैं।
स्वस्थ मन से हर बाधा को पार कर सकतें हैं। अति मोह -माया, लोभ-भोग औऱ वासना से मन में भटकाव उत्पन्न होता हैं। मन की शांति और जीवन को सुखमय बनाने के लिए हम विभिन्न उपाए करते हैं। जिसमें दान- सेवा, सहयोग- करुणा, दया- क्षमा शामिल है। अपनी आत्मा में परमात्मा को महसूस करिए। बुरे कर्म, विचार औऱ व्यवहार का त्याग कीजिए।
मन से तुलना, निंदा, क्रोध -बैर और दुश्मनी के भाव को हटाकर देखिए! किसी बात पर अहंकार मत किजिए। मन से हर तरह के दुर्भाव के मिटने से ही जीवन का हर पल सुंदर बनता हैं।मन बुरे विचारों से अधिक बोझिल होता हैं। उत्साहित औऱ प्रसन्नचित मन ही सभी सुख का आधार हैं।
मन को छल-कपट, और धोखा से मुक्त रखिए। स्वस्थ मन से हर बाधा को पार कर सकतें हैं। अति मोह -माया, लोभ- भोग और वासना से मन में भटकाव उत्पन्न होता हैं।निस्वार्थ कर्म से
मन को शक्तिशाली बनाकर, हम जीवन को अद्भुत बना सकतें हैं। शुद्ध हृदय से किया गया कर्म हमें निर्भीक बनाता हैं। जो विश्वास से जुड़े हैं उन्हें कभी किसी कारण से मत तोड़िए। हर किसी के साथ बिना छल के जुड़िए। हर किसी के प्रति वफादार रहिए, तभी आपके जीवन में चमत्कार होंग। जो व्यक्ति सच के साथ जीवन जीते हैं, उनके चेहरे में ही खुशियों की चमक होती है। झूठ के बल पर ज्यादा दूर तक जीवन का सफर संभव नहीं। आप मन में जैसी धारणा बनाते हैं, वैसे ही धीरे -धीरे व्यवहार करने लगते हैं।
मन की शक्ति का अंदाजा लगाना मुश्किल हैं। मन को कठोर नहीं, विन्रम बनाकर हर जंग जीत सकतें हैं। एक बार मन से जो उतर गया उसे दोबारा मौका मत दो की वो आपके मानसिक शांति क़ो नष्ट करें। जिसने मन को दुर्बल बनाने का प्रयास किया। मन को शक्तिशाली बनाकर जीवन में आगे बढ़ते रहने का नाम ही जिंदगी हैं।







